वहीं बीजेपी की बढ़ती साख से घबराए विपक्षी दलों में महागठबंधन को लेकर सुगबुगाहट तो लंबे समय से चल रही है लेकिन जैसे- जैसे 2019 करीब आ रहा है पार्टियों के अध्यक्षों का मिलना जुलना भी तेज हो रहा है। मंगलवार को 10 जनपथ पर हुई बैठक में जहां विपक्षी दलों ने अगले आम सभा चुनाव में भाजपा को पटखनी देने के लिए संयुक्त मोर्चा के गठन पर बात की।
वहीं समविचारी गठबंधनों को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी महागठबंधन की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि देश में अघोषित आपातकाल से भी बदतर स्थिति बनी हुई है।
पिछले दिनों हुई सोनिया गांधी की डिनर डिप्लोमेसी को विपक्षी दल भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। लेकिन यहां बताना महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस रात्रि भोज में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट भी सुनाई दी थी लेकिन ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती की अनुपस्थिति ने इसे थोड़ा कमजोर कर दिया था।