फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Rahul Gandhi: यूं ही नहीं राहुल ने लगाया चुनावों के बाद भी मणिपुर पर दांव, यह है कांग्रेस का 'प्लान'

आशीष तिवारी
Updated Wed, 10 Jul 2024 01:50 PM IST

सार

कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के साथ मणिपुर मामले में राहुल गांधी की ओर से किए गए वादे और आश्वासन को लेकर रणनीति बनाई गई। सूत्रों के मुताबिक इस रणनीति के तहत मणिपुर के लोगों को कांग्रेस लगातार ऐसे ही समर्थन करती रहेगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन
राहुल गांधी का मणिपुर दौरा। - फोटो : अमर उजाला


राहुल गांधी मंगलवार को रायबरेली में थे। कहने को तो राहुल गांधी बीते एक महीने में दूसरी बार रायबरेली पहुंचे हैं। लेकिन रायबरेली से ज्यादा चर्चा राहुल गांधी की मणिपुर यात्रा को लेकर हुई है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के साथ मणिपुर मामले में राहुल गांधी की ओर से किए गए वादे और आश्वासन को लेकर रणनीति बनाई गई। सूत्रों के मुताबिक इस रणनीति के तहत मणिपुर के लोगों को कांग्रेस लगातार ऐसे ही समर्थन करती रहेगी। कहा यह भी जा रहा है कि मानसून सत्र में कांग्रेस एक बार फिर से मणिपुर के मुद्दे पर बड़ी तैयारी के साथ संसद पहुंचने वाली है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया कहते हैं कि राहुल गांधी ने चुनावों के बाद मणिपुर जाकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी पार्टी और उनके नेता कोई सियासत नहीं कर रहे हैं। वह हकीकत में मणिपुर के दुख दर्द को महसूस कर रहे हैं और उनकी आवाज बनकर उनके लिए न्याय मांग रहे हैं।




हालांकि सियासी रणनीतिकार इसको एक अलग नजरिए से देखते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने बहुत ही सधे तरीके से मणिपुर को अपने सियासी तरकश में सजाने की तैयारी की है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार डीपी सिंह कहते हैं कि चुनाव के दौरान जब राजनीतिक दल कोई गर्म मुद्दा उठाते हैं, तो उसके सियासी मायने निकाले जाते हैं। क्योंकि इस वक्त चुनाव खत्म हो चुके हैं। ऐसे में राहुल गांधी का मणिपुर जाना और वहां के लोगों से मिलना सियासी नजरिए से बहुत दूरदृष्टि जैसा दिख रहा है। सिंह कहते हैं कि जनता के बीच में एक नैरेटिव सेट करना भी सियासी पार्टियों के लिए बड़ा टास्क होता है। राहुल गांधी मणिपुर जाकर इस वक्त जो काम कर रहे हैं वह एक नैरेटिव सेट करने जैसा ही है। उनका मानना है कि कांग्रेस पार्टी की ओर से मणिपुर जाना और वहां के लोगों की समस्याओं को सामने लाकर वह न सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट और मणिपुर में कोई संदेश देना चाहते हैं, बल्कि दक्षिण से लेकर उत्तर और पूर्व से लेकर पश्चिम तक वह सियासी संदेश देने की पिच तैयार कर रहे हैं। डीपी सिंह कहते हैं मणिपुर को लेकर लगातार देश के लोगों में अलग अलग तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों में भावनात्मक तौर पर मणिपुर से जुड़े हुए लोगों का समर्थन कांग्रेस पार्टी लेने की फिराक में भी है। सियासी जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का मणिपुर दौरा उसी भावनात्मक समर्थन को बूस्टर के तौर पर देखते हुए आगे की सियासी पिच तैयार कर रही है।

 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और उनकी न्याय यात्रा के बाद जो छवि बदली है, उसे ही आगे बढ़ाने की यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। वरिष्ठ पत्रकार सुमित कुमार कहते हैं कि मणिपुर मामले पर कांग्रेस का आक्रामक रवैया आने वाले दिनों में सियासत की कहानी कह रहा है। सुमित कहते हैं कि जिस तरीके से हाल में ही मणिपुर मामले को लेकर संसद में नारेबाजी होती रही। वह राहुल गांधी की मणिपुर यात्रा के बाद और आक्रामक होने के संकेत दे रही है। दरअसल यह बात तो सच है कि विपक्ष लगातार मणिपुर मामले को उठाता आया है। चुनावी माहौल में ऐसे उठाए जाने वाले संदेशों को सियासी नजरों से देखा जाता है। लेकिन अब जब चुनाव नहीं है और वहां के लोगों की आवाज को कोई नेता उठा रहा है, तो मनोवैज्ञानिक तौर पर इससे लोगों के ज्यादा से ज्यादा जुड़ने का राजनीतिक दल अनुमान लगाते ही हैं। कांग्रेस भी इसी लिहाज से मणिपुर मामले को लेकर अपना दबाव केंद्र सरकार पर बना रही है। हालांकि सियासी जानकारों का मानना है कि इसका राजनीतिक रूप से असर आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों से लेकर नॉर्थ ईस्ट की सियासत पर देखने को मिल सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next