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हरियाणा का प्रधान तय करने की पंचायत निपटा रहे हैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

Thu, 27 Jun 2019 07:07 PM IST
Gaurav Pandey शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर उसे मनवाने पर अड़े राहुल गांधी हरियाणा का प्रधान (कांग्रेस अध्यक्ष) तय करने की पंचायत निपटा रहे हैं। हरियाणा के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद भी इस बैठक में मौजूद हैं। गुलाम नबी चाहते हैं कि किसी भी तरह से विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी खत्म हो। 

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परिवर्तन यात्रा के दौरान हरियाणा में नेताओं के बिखराव को गुलाम नबी आजाद ने प्रत्यक्ष तौर पर महसूस किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वर्तमान अध्यक्ष अशोक तंवर, कु. शैलजा, रणदीप सुरजेवाला समेत अन्य खेमेबाज नेता बन गए हैं। आजाद का मानना है कि जबतक पार्टी एक लय में नहीं आएगी, हरियाणा विधानसभा चुनाव में बड़ी चुनौती नहीं खड़ी की जा सकती।

हुड्डा लगा रहे हैं जोर

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा दोनों लोकसभा चुनाव हार गए थे। जाट बहुल सीट पर भी हुड्डा परिवार अपना ताकत नहीं दिखा पाया। फिर हुड्डा राज्य की कमान पाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। बैठक में भाग लेने के लिए हुड्डा अशोक तंवर के कामकाज का पूरा कच्चा चिट्ठा लेकर राहुल गांधी के पास पहुंचे हैं। 

हुड्डा और अशोक गहलोत का समीकरण ठीक है। अशोक गहलोत राहुल गांधी तक अपनी बात पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। हुड्डा ने गुलाम नबी आजाद से भी राज्य के राजनीतिक समीकरण को लेकर लंबी चर्चा की है। हुड्डा लगातार यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि हरियाणा में कांग्रेस को केवल उनके नेतृत्व में खड़ा किया जा सकता है। 

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हरियाणा कांग्रेस के एक बड़े तबके का भी मानना है कि भूपेंद्र हुड्डा राज्य कांग्रेस के सभी नेताओं में सबसे मजबूत जमीनी आधार रखते हैं। राज्य की जाट बिरादरी में भी उनका अच्छा प्रभाव है। राव दान सिंह समेत अन्य भी हुड्डा के साथ खड़े हैं। कैप्टन अजय यादव की तरह ही अहिरावल पर राव दान सिंह भी प्रभाव रखते हैं। 

किसी तरह कुलदीप विश्नोई से पीछे हटे

हरियाणा का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की दौड़ में कुलदीप विश्नोई का नाम तेजी से उछला था। इसका आधार भी बनने लगा था। पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन फिलहाल उनपर अब चर्चा नहीं हो रही है। बताते हैं कुलदीप का नाम उछलता देखकर हुड्डा ब्रिगेड भी सक्रिय हो गई थी। 

इसके अलावा हरियाणा प्रदेश कांग्रेस का अशोक तंवर समेत अन्य खेमा भी सक्रिय हो गया था। राज्य के नेताओं ने बड़ी मेहनत करके कांग्रेस अध्यक्ष के पास संदेश भिजवाया कि कुलदीप विश्नोई के बल पर हरियाणा में कांग्रेस दम नहीं भर सकती। क्योंकि विश्नोई हरियाणा के अन्य समीकरणों पर पकड़ नहीं रखते। 

अशोक तंवर कप्तान तो हैं ही

अभी हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर हैं। अशोक तंवर का खेमा भूपेंद्र हुड्डा का धुर विरोधी है। खेमे के लिए टीम हुड्डा साथ नहीं दे रही है। इसी तरह से कुछ अन्य नेता भी खेमेबाजी कर रहे हैं। इसके कारण पार्टी को कई मोर्चे पर मात खानी पड़ी है। 

अशोक तंवर भी पिछले पांच साल का पूरा रिकार्ड लेकर राहुल गांधी के पास बैठक में है। तंवर युवा और आक्रामक तेवर वाले हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने तंवर में एक जोश देखकर हरियाणा का अध्यक्ष बनने में उनका साथ दिया था। 

कांग्रेस अध्यक्ष देंगे सख्त हिदायत

राहुल गांधी हरियाणा में नेतृत्व के निर्णय को काफी समय से टाल रहे हैं। उन्होंने एक के बाद एक नेताओं को इस मोर्चे पर लगाया। इस समय कांग्रेस की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले गुलाम नबी आजाद वहां के प्रभारी हैं। गुलाम नबी भी हरियाणा में नेताओं की गुटबाजी से तंग हैं। 

आजाद के एक करीबी के मुताबिक कांग्रेस की राज्य में हालत रस्सी जल जाने के बाद भी बल न जाने वाली है। ऐसे में माना जा रहा है कि लोकसभा में करारी हार से तंग कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के नेताओं को  गुटबाजी खत्म करने की सख्त हिदायत दे सकते हैं। 

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