पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का अनुसरण करते हुए राहुल गांधी हर रोज कांग्रेस को बदल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के 84 वें महाधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की थी कि उन्होंने पार्टी के नेताओं के लिए मंच को पुराने नेताओं से खाली कर दिया है। इस पर अमल करते हुए वह नये, युवा चेहरे को लगातार पार्टी फ्रंट लाइन में जगह दे रहे हैं।
इलाहाबाद से कांग्रेस के नेता अनुग्रह नारायण सिंह को कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तराखंड का प्रभारी बनाया है तो शक्ति सिंह गोहिल को बिहार की कमान दी है। गोहिल को पार्टी के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी की जगह बिहार का प्रभार सौंपा गया है।
इसी तरह से कमलेश्वर पटेल के स्थान राहुल ने चंदन यादव को एआईसीसी सचिव नियुक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी है। यशोमति ठाकुर, एमएलए को एआईसीसी का सचिव नियुक्त करके उन्हें कर्नाटक के प्रभारी केसी वेणुगोपाल के साथ संबद्ध किया है।
कांग्रेस सांसद राजीव सतव को गुजरात का प्रभार सौंपा तो पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को उड़ीसा का प्रभार सौंपा है। जितेन्द्र सिंह को पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव बीके हरिप्रसाद के स्थान पर यह नई जिम्मेदारी मिली है।
कांग्रेस सेवा दल का दायित्व संभाल रहे महेन्द्र जोशी के स्थान पर लालजी देसाई को यह प्रभार सौंपा है। नितिन राऊत को के. राजू के स्थान पर अनुसूचित जाति विभाग का प्रभार सौंपा तो तमरध्वज साहू को अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है। वह इस समय दिन किसी न किसी के नियुक्ति की प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहे हैं।
जनार्दन की जगह अशोक के नाम ने काफी चौंकाया
अशोक गहलोत
कांग्रेस अध्यक्ष ने पिछले महीने तक संगठन का कामकाज देख रहे पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी के स्थान पर अशोक गहलोत को नियुक्त किया। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस बार राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में भी गिना जा रहा है।
राजनीति के चतुर खिलाड़ी गहलोत ने गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। जनार्दन द्विवेदी जैसे दिग्गज और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी नेता के स्थान पर गहलोत को जिम्मेदारी देने को काफी अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर राहुल गांधी की कोशिश कांग्रेस को युवा और जुझारु बनाना है। देखना है कि वह समय के साथ कितना न्याय कर पाते हैं।
अभी तो यह झांकी है
राहुल गांधी
कांग्रेस पार्टी में हर किसी के कान होने वाले संगठनात्मक बदलाव को सुनना चाह रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष फिलहाल इसकी भनक नहीं लगने दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अभी तो बदलाव की प्रक्रिया शुरू भर हुई है। अभी कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों के नाम की घोषणा होनी है। इसके अलावा पार्टी के आंतरिक संगठन में बड़ा बदलाव होना है। बताते हैं यह प्रक्रिया मई महीने तक चलने के आसार हैं।
अभी उ.प्र. से एक चेहरे को कांग्रेस पार्टी के केन्द्रीय संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देनी है। जौनपुर से विधायक रहे नदीम जावेद, राहुल के कार्यालय के प्रभारी रहे कनिष्क सिंह समेत अन्य की भी संगठनात्मक जिम्मेदारी तय की जानी बाकी है।
इसके अलावा तमाम राज्यों में भी संगठनात्मक चेहरे में बदलाव होना है। ताकि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बदलाव महसूस हो और वे पूरी ऊर्जा के साथ 2019 के आम चुनाव में बड़ा राजनीतिक अभियान चला सकें।