जीएसटी की तरह अचानक रात 12 बजे लागू नहीं कर देंगे। न ही नोटबंदी की तरह मनमाने ढंग से लागू कर जनता का नुकसान करेंगे। योजना तरीके से और चरणों में लागू होगी। कांग्रेस की सरकार आने पर सर्वें कराएंगे, अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार होगी। 12 हजार रुपये की न्यूनतम आय तय करेंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 20% लोग जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और जिनकी सालाना आय 72 हजार से कम हैं, उन्हें पहले ‘न्याय’ मिलेगा। इससे लोग गरीबी की रेखा से बाहर आएंगे और अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी। मनरेगा और अन्य योजनाओं से यूपीए सरकार ने 14 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से बाहर निकाला था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इन्हें फिर गरीब बना दिया।
* कर्ज माफी और ‘न्याय’ से अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा?
‘न्याय’ कोई योजना नहीं, दर्शन है। जिसके साथ अन्याय होगा कांग्रेस पार्टी उसके साथ खड़ी होगी। किसान की कर्ज माफी योजना भी उनके साथ न्याय है। आप बताइए प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चोकसी का क्या किया? उद्योगपतियों का 3.5 लाख करोड़ रुपये का कर्जा माफ कर दिया। हम यदि किसानों का कर्जा माफ करने की बात कर रहे हैं तो कहां गलत हैं। अगर उद्योग जगत के साथ भी अन्याय हुआ तो राहुल गांधी उसके साथ भी खड़ा होगा। न्याय कांग्रेस की विचारधारा का केंद्र बिंदु है।
* इसकी निगरानी कैसे होगी?
तकनीकी का युग है। मोबाइल, इंटरनेट, आधार कार्ड समेत काफी कुछ है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से निगरानी कर सकते हैं। लीकेज रोक सकते हैं। हम गरीबी दूर करने के लिए जो करने जा रहे हैं, वह कांग्रेस की सर्जिकल स्ट्राइक है। ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक, जिसे किसी और देश ने नहीं किया। हम ऐसी ही कुछ और सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले हैं।
* विरोधियों का आरोप है कि आप लोगों को घर बैठाकर खिलाने की बात कर रहे हैं। लोग काम करना छोड़ देंगे?
एक सवाल आपसे पूछता हूं। क्या अनिल अंबानी ने काम करना बंद कर दिया? उनके पास तो बहुत पैसा था। वह आज भी काम तो करते होंगे? आप बताइए क्या किसान काम नहीं करता? क्या वह अपने बच्चों को स्कूल, विश्वविद्यालय में पढ़ाना नहीं चाहता? अच्छे इलाज की सुविधा नहीं चाहता। सपने नहीं देखता और उसे अपना भविष्य नहीं चाहिए? मेरे विचार में किसान, गरीब, मजदूर तबका भी 12 हजार रुपये महीने की न्यूतनम आमदनी की श्रेणी से बाहर निकलना चाहता है। गरीबी की जंजीरें उसे बेबस करती हैं। हम उस जंजीर को तोड़ रहे हैं। मनरेगा से आय बढ़ी तो बाजार में मांग बढ़ी। उत्पादन बढ़ा तो रोजगार भी बढ़े।
* सब्सिडी का बोझ भी कम करेंगे?
सब्सिडी जारी रहेगी। इसकी अभी जरूरत है, लेकिन हम सब्सिडी की समीक्षा करेंगे। कुछ गैर जरूरी सब्सिडी रुकेंगी, कुछ में कमी करेंगे। इसे तर्कसंगत बनाया जाएगा।
* कांग्रेस के बारे में आम है कि यहां निर्णय बहुत देर से होते हैं?
इसका कारण है। कांग्रेस सुनती है। सबकी सुनती है। सुनने में समय लगता है। इसलिए फैसले लेने में देर हो जाती है।
* मोदी सरकार के पांच साल पूरे हो रहे हैं। आप सरकार के कामकाज को कैसे देखते हैं।
मोदीजी के प्रचार-प्रसार का तरीका बहुत अच्छा है। वो प्रधानमंत्री कम प्रचार मंत्री ज्यादा हैं। उनका संवाद ए-वन है। उनके दो-तीन विचार या योजनाएं भी बहुत अच्छी थीं। जैसे मेक-इन इंडिया, लोगों के खाते में 15-15 लाख रुपये देने की घोषणा। लेकिन उन्होंने इसमें झूठ मिला दिया। हमने उनसे उनका आइडिया ले लिया। अब हर गरीब के खाते में सालाना 72 हजार और पांच साल में 3.60 लाख रुपये डालेंगे। हम सरकार बनने पर ऐसा करने वाले हैं और इसमें कोई झूठ नहीं है।
दूसरा, मोदीजी दूसरों पर भरोसा नहीं करते। वे अपने जनरलों (गृहमंत्री, रक्षामंत्री, परिवहन मंत्री, वित्तमंत्री) पर भरोसा नहीं करते। उन्हें काम करने की कोई छूट नहीं है, इसलिए पांच साल के कामकाज में केवल मोदीजी के वादे आए। वादों का परिणाम नहीं आया। उन्होंने निर्णय ले लिया कि नोटबंदी तो अचानक नोटबंदी। रात 12 बजे जीएसटी। दरअसल मोदीजी की समस्या पॉलिटिकलाइजेशन ऑफ पावर (सत्ता के राजनीतिकरण) से जुड़ी है। वे बोलते अच्छा हैं, सुनते कम हैं।
जबकि प्रधानमंत्री को सबको सुनना चाहिए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि लाइन में जो आखिरी व्यक्ति खड़ा है, उसकी बात ध्यान से सुनो। इसका अर्थ यही है कि जिसके साथ अन्याय हो रहा है, उसे ध्यान से सुनो। कॉरपोरेट जगत हो या कारोबारी, गरीब, मजदूर, किसान हो या मध्य वर्ग। मोदीजी किसी की नहीं सुनते सिर्फ बोलते हैं, इसलिए उनकी सरकार नतीजे नहीं दे पाई।
* प्रियंका गांधी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी की सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनीं हैं। उन्हें थोड़ा पहले लाते तो ज्यादा ठीक होता?
आप 2004 के लोकसभा चुनाव को याद कीजिए। मैं राजनीति में आया तब भी यही कहा जा रहा था। लोग कह रहे थे वाजपेयीजी की लहर है। कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकती। मुझसे कहते थे कि आप पहले राजनीति में क्यों नहीं आए? यह सवाल पुराना है। मैं तब से सुन रहा हूं। सही बात यह है कि मैं काफी सालों से प्रियंका से कहता था कि तुम राजनीति में आओ, लेकिन तब उसके बच्चे छोटे थे। कहती थी परिवार के प्रति एक जिम्मेदारी है।
अब बच्चे बड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ने जाने लगे हैं। जब इसका हवाला देकर कहा तो वह कैसे मना कर सकतीं थीं, मान गईं। देखिए, हम (कांग्रेस) हिंदुस्तान की सोच को जिंदा रखने और इससे लोगों को जोड़ने में विश्वास करने वाले लोग हैं। हमारे पिता से लेकर मेरे और प्रियंका के भीतर तक बयानों में आपको यह देखने को मिलेगा। हम हिंसा, नफरत, बंटवारा, लड़ाने में भरोसा नहीं करते।
* प्रियंका ने कहा है कि यदि पार्टी कहेगी तो वे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। आप क्या कहेंगे?
मुझे नहीं लगता कि प्रियंका इस बार लोकसभा चुनाव लड़ेगी। यदि वह मुझसे चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करेंगी तो मैं मना नहीं करूंगा। या फिर कोई विशेष परिस्थिति आई तो अलग बात है। अभी प्रियंका के चुनाव लड़ने के बारे में मुझे कोई अंदेशा नहीं है। न ही प्रियंका ने ऐसा कुछ कहा है।
* जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर कांग्रेस इतना डिफेंसिव क्यों हो जाती है। भाजपा इसको लेकर कांग्रेस पर पाकिस्तान से प्रेम तक का आरोप लगाती है?
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद हो या जम्मू-कश्मीर का मामला, हम रक्षात्मक (डिफेंसिव) नहीं होते। हमारी नीति स्पष्ट है और सीमा पार का आतंकवाद सहन नहीं कर सकते। आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति रही है। हमारी मेहनत और नीति से 2012 तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं रुक गई थीं। राज्य में शांति बहाली आई थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने वहां आतंकवाद, हिंसा, नफरत और पाकिस्तान के लिए रास्ता खोल दिया।
हमने नौ साल तक वहां काम किया। उद्योगपति रतन टाटा को जम्मू-कश्मीर ले गए। वहां उद्योग और निवेश पर चर्चा की। आतंकवाद समाप्त हो गया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए पीडीपी से गठबंधन करके महबूबा मुफ्ती के साथ साझा सरकार बनाई और जम्मू-कश्मीर में बन रहे अमन चैन के वातावरण को ध्वस्त कर दिया।
* आप यूपी में गठबंधन के हिमायती थे लेकिन क्यों नहीं हो पाया?
यूपी में गठबंधन हुआ, दो तिहाई हुआ। पूरा नहीं हुआ। हमने कहा कि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी सपा, बसपा के साथ खड़ा होना चाहती है, लेकिन हमें कोई उत्तर नहीं मिला। अब हम वहां कांग्रेस पार्टी को खड़ा कर रहे हैं। यूपी में प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगाया है। हमने उनसे कहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए काम करना है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अगली सरकार बनाएगी।
* कोलकाता हो या यूपी गठबंधन, महागठबंधन तो हो नहीं सका। विपक्षी एकता भी धरी की धरी रह गई। चुनाव बाद प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर क्या रहेगा?
इसको चुनाव के बाद देखेंगे। अभी मोटे तौर पर सभी विपक्षी दलों में सहमति बनी है कि 2019 के चुनाव में मिलकर मोदीजी को हराएंगे। हम एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। अभी प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। इस पर चुनाव के बाद तय करेंगे।
* आपके दो स्थान से चुनाव लड़ने की चर्चा है। क्या अमेठी को लेकर कोई संदेह है या फिर कोई राजनीतिक टोटका कि इंदिराजी, सोनियाजी दक्षिण से लड़ीं तो पार्टी जीत गई?
मुझे अमेठी से लगाव है और मैं अंधविश्वासी नहीं हूं। टोटकों में विश्वास नहीं करता। अमेठी से चुनाव लड़ूंगा। मैं यूपी से सांसद हूं और वहीं का होकर रहूंगा। दो जगह से चुनाव लड़ने की मांग दक्षिण भारत से आई है। दरअसल, इसकी वजह भी मोदी ही हैं। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच में प्यार, सद्भाव का रिश्ता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में केरल, तमिलनाडु आदि में भाजपा ने ध्रुवीकरण की जैसी कोशिश की है, वहां के लोगों को अपनी भाषा व संस्कृति पर खतरा दिख रहा है। इस हालात में उनकी मांग सही है। हालांकि अभी हमें इस पर निर्णय लेना है।
हिंदुत्व किसी की जागीर नहीं, दुनिया को रास्ता दिखाने वाला धर्म है
* आपने मंदिर और धर्म की राजनीति शुरू की है। एक तरह से भाजपा का हिंदुत्व एजेंडा छीन लिया है। ये प्रेरणा आपको कहां से मिली? आपने मंदिरों में जाना शुरू किया, दरगाहों में गए व कैलाश मानसरोवर हो आए, इसका क्या कारण है?
मैं इस विचार को ही भारतीय संस्कृति के विरुद्ध मानता हूं। हिंदू धर्म किसी से छीना नहीं जा सकता। हिंदू धर्म इतना बड़ा है कि इसका कोई मालिक नहीं हो सकता है। इस पर सबका अधिकार है। हिंदू धर्म पूरी दुनिया को रास्ता दिखाने का तरीका है। यह आप कैसे कह सकते हैं कि हिंदू धर्म उनका है या मेरा है। हम सब तो कण भर हैं। अब भाजपाइयों में अगर इतना घमंड है कि वो सोचते हैं कि वो धर्म के ठेकेदार हैं, तो आप उन्हें परखें।
मेरी धार्मिक सोच है, मेरी आध्यात्मिकता है। मैं अलग-अलग धर्मस्थानों पर जाना चाहता हूं। जो भी मुझे बुलाएगा, जाऊंगा। अगर वो हिंसा की बात न करें, किसी से नफरत न करें, किसी को न मारें, तो मैं जाऊंगा भी और उनकी सोच का आदर भी करूंगा। अगर मुझे कोई मंदिर में बुलाए और कहे कि इस रास्ते को समझिए तो मैं अवश्य जाऊंगा। मस्जिद में बुलाए, गुरुद्वारे में बुलाए, जैन मुनि जी के पास ले जाए, मैं जाऊंगा। यही इस देश का इतिहास है।
हिंदू धर्म में निर्मलता ही निर्मलता है। प्यार है, भाईचारा है। हिंदू धर्म में कठोरता कहां है? मुझे दिखाइये हिंदू धर्म में कहां लिखा है कि अपने से कमजोर लोगों को मारना चाहिए? कहां लिखा है कि धर्म के नाम पर कोई नफरत परोसे या हत्या करे? कहां लिखा है कि घमंडी हो जाएं? मैंने उपनिषद पढ़े हैं, वेद भी पढ़े, भगवत गीता भी पढ़ी, पर कहीं कठोरता नहीं नजर आई। घमंड का अंत ही धर्म के सिद्धांतों की पहली शुरुआत है।
* दावा है कि मोदीजी ने देश को महाशक्ति बना दिया। क्या आपको 2019 के चुनाव को लेकर कोई भ्रम है?
मैं अपने काम में विश्वास रखता हूं। सच्चाई मेरा रास्ता है। आपको सार्वजनिक जीवन में मेरा रिकॉर्ड देखने पर व भाषण में कही मेरी बातों से शायद एक भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा, जहां मैंने गलत या झूठ बोला हो। वहीं, 5 साल पहले मोदीजी ने सत्ता पाने के लिए बहुत सारे वादे किए। बैंक अकाउंट में 15 लाख डालने से लेकर 2 करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार देने तक के। किसानों से भी झूठ बोला।
सच्चाई यह है कि उन्होंने ऐसे झूठे वादे किए जो कभी पूरे नहीं हो सकते थे, इसीलिए अब ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। कभी सेना के शौर्य के पीछे छुपकर, तो कभी वायुसेना की बहादुरी का इस्तेमाल करके। वायुसेना हो या सेना, अपनी बहादुरी से देश की रक्षा करते हैं। मैंने इससे पहले किसी प्रधानमंत्री को सेना की बहादुरी का राजनीतिक फायदा उठाते नहीं देखा।
यह वाजपेयीजी ने भी नहीं किया और न ही बाकी प्रधानमंत्रियों ने। मनमोहन सिंह जी के समय में तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक हुईं, लेकिन उन्होंने भी इसका श्रेय नहीं लिया। बुधवार को एक घंटे तक मोदीजी ने संशय बनाए रखा और फिर हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की 2012 से चल रही मेहनत का श्रेय खुद ले लिया।