दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के एक दिन बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसों से पहले रोकथाम के ठोस कदम नहीं उठाए जाते और घटना के बाद जिम्मेदारी कुछ छोटे अधिकारियों पर डाल दी जाती है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने पिछले चार महीनों में सैदुलाजाब में इसी तरह की घटना में छह लोगों की मौत और हौज रानी में आग लगने से 22 लोगों की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर हादसे के बाद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की बात होती है, लेकिन असली जिम्मेदारी तय नहीं होती। राहुल ने कहा कि हादसों को रोकने के लिए पहले से जरूरी कदम उठाने के बजाय घटना के बाद केवल दिखावटी सक्रियता नजर आती है।
हर बार BJP सरकार का वही शर्मनाक पैटर्न - हादसों से पहले रोकथाम नहीं, उनके बाद बयानबाज़ी होती है, कुछ छोटे अफ़सरों पर ज़िम्मेदारी मढ़ दी जाती है, और असली गुनहगार जवाबदेही मुक्त रहते हैं।
विज्ञापन
सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। पिछले 4 महीनों में… — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 7, 2026
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कोई जवाबदेही नहीं है का जिक्र किया और ‘TINA’ हैशटैग का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सरकार हर बार एक जैसा रवैया अपनाती है और हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय कुछ निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई तक मामला सीमित रह जाता है। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली में जब ट्रिपल इंजन की सरकार है तो ऐसी घटनाओं को रोकने में बेबसी क्यों दिखाई दे रही है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब कोई सरकार से जवाबदेही मांगता है तो प्रधानमंत्री की ओर से उसे 'दिमागी नक्सल' और 'नाराज फूफा' जैसे लेबल दिए जाते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सवाल उठाने वालों को शर्मिंदा, बदनाम और चुप कराने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और लोगों की जान से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली में कई गंभीर घटनाएं हुई हैं। उनके मुताबिक, सैदुलाजाब में एक हादसे में छह लोगों की जान गई, जबकि हौज रानी में आग की घटना में 22 लोगों की मौत हुई। उन्होंने इन घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बार-बार लोगों की जिंदगी और सपने मलबे में दब रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।