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राहुल गांधी की अपील पर अखिलेश कांग्रेस से कर सकते हैं चुनावी गठंबधन

Mon, 24 Oct 2016 05:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty images
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यूपी की सियासत में लगातार बदले हालात के दौर में इस बात के भी कयास लगाए जाने लगे हैं कि अखिलेश अब कदम पीछे नही खीचेंगे और अगर जरूरत हुई तब वह अलग सियासी दल भी बना सकते हैं। वैसे इस कयास ने विरोधी दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि ऐसा होने पर प्रदेश में होने वाले चुनाव में राजनीतिक समीकरण क्या होंगे ? दरअसल, अखिलेश के अलग सियासी दल बनाने के कयास को बल मिला है मुलायम यादव और शिवपाल यादव के आरोप से। 
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रामगोपाल की तरफ से रविवार को खुला पत्र लिखने के बाद मुलायम सिंह खेमे से आरोप लगे कि पत्र लिखने वाले चुनाव आयोग जाकर अलग पार्टी बनाने की कोशिश में लगे हैं। दोपहर बाद शिवपाल यादव ने तो मीडिया के सामने ही साफ कर दिया कि रामगोपाल यादव तीन बार चुनाव आयोग गए। उसके बाद शिवपाल खेमे की तरफ से दिल्ली में  यहां तक चर्चा फैल गई कि अखिलेश अलग दल बना रहे हैं। उनके दल का नाम प्रगतिशील समाजवादी पार्टी होगा और चुनाव चिह्न मोटरसाइकिल संभावित है। 

हालांकि अखिलेश ने यह कहकर कि वह सपा से अलग नहीं जा रहे है और पिता मुलायम सिंह से उनका कोई विरोध नहीं हैं। वैसे चुनाव आयोग की तरफ से इस बाबत कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इतना जरूर जानकारी में आया है कि मंगलवार को  विधानसभा क्षेत्र की समस्या के सिलसिले में जरूर सपाई चुनाव आयोग गए थे।    
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अखिलेश में रिश्ते मधुर हैं

- फोटो : amar ujala
इन सबके के बाद भी अटकलों का बाजार गरम रहा।  सूबे के दूसरे दलों में बैचेनी फैली है। यहां तक कयास लगाए जाने लगे कि अखिलेश के साथ बिहार के सीएम नीतीश कुमार, रालोद के अजित सिंह, बसपा के पूर्व मंत्री आरके चौधरी, झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी और सूबे के दूसरे दलों का संभावित गंठबंधन बन सकता है। 

हालांकि तर्क यह भी कि सपा दो फाड़ होने पर अजित सिंह का रुख शिवपाल के लिए नरम हो सकता है। नीतीश की पसंद अखिलेश रहे हैं। वह आपने साथ आने का न्यौता भी कई बार दे चुके हैं। 

राजनीतिक हल्कों में एक कयास यह भी है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अखिलेश में रिश्ते मधुर हैं। दोनों एक दुसरे की अक्सर तारीफ करते रहते हैं। इसलिए अखिलश  चुनावी गठंबधन की नौबत आने पर कांग्रेस के साथ खड़े हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मनना है कि सपा की लड़ाई अभी बढ़ेगी। 
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