परिवार की रार में कई समाजवादी नेताओं को अपने राजनीतिक कॅरियर पर खतरा मंडराता दिख रहा है। इसमें वे तमाम लोग हैं जो पूर्व में या हाल में सत्ता की चाहत में सपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में वे किनारा तलाशने लगे हैं। चाचा-भतीजे की लड़ाई में ऐसे नेता अपने राजनीतिक सफर को विराम नहीं लगने देना चाहते। प्रत्याशियों के माथे की शिकन बढ़ गई है सो अलग।
वर्ष 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद से भाजपा-बसपा सहित कई दलों के नेता समर्थकों के साथ सपा से जुड़ गए थे। कुछ चुनाव से पहले ही उनके साथ हो लिए। अब तक तो सब ठीकठाक चलता रहा। मगर, अब हुई कलह ने उन्हें विचलित कर दिया है।
वह भी उस वक्त जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में कुछ कद्दावर चेहरे ‘घर वापसी’ की तैयारी में हैं। सूत्रों की मानें तो इनकी पुरानी पार्टी के पुराने संबंधों के माध्यम से नए मुखियाओं से मुलाकात भी हो गई है।