प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में घुसकर की गई वायुसेना की कार्रवाई और उसके बाद पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों को खदेड़ने का जिक्र करते हुए तीन मार्च को कहा कि आज राफेल लड़ाकू विमान की कमी महसूस हो रही है। अगर राफेल विमान हमारे पास होता तो परिणाम इससे कुछ अलग होता। आखिर राफेल विमान में ऐसी क्या बात है कि इसे दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में शुमार किया जाता है। आइए जानते हैं इसकी ताकत, साथ ही जानेंगे किस तरह भारत-फ्रांस के बीच इसे लेकर डील हुई और इसमें क्या विवाद हुए।
राफेल विमान की खासियत
राफेल एक दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है। इसे फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन बनाती है। राफेल लड़ाकू विमानों को 'ओमनिरोल' विमानों की श्रेणी में रखा गया है, जो किसी भी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने की क्षमता रखते हैं। यह लड़ाकू विमान हवाई हमला, जमीन में सेना की मदद और दुश्मन पर बड़े हमले को अंजाम दे सकती है। इसके अलावा परमाणु हथियारों के खिलाफ भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
जानिए राफेल की ताकत
लंबाई- 10.3 मीटर
ऊंचाई- 5.3 मीटर
विमान का वजन - 24,500 किलोग्राम
इंजन- एम888-2 के दो इंजन
अधिकतम गति- 1,389 किलोमीटर प्रति घंटा
मारक क्षमता- 3,700 किलोमीटर
कौन-कौन से हथियार
गन- जीआईएटी 30/719बी
हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल- एमआईसीए आईआर/ईएम, मैजिक II
हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल- एबीडीए अपाचे, स्कल्प ईजी, एएएलएम, जीबीयू-12, पेववे II, एएम 39 एक्जोसेट, एएसएमपी-ए न्यूक्लियर
राफेल खरीदने की वजह
राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया में टेंडर जारी किया गया। जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माता कंपनियों ने अपने विमान के बारे में पेशकश की। वायुसेना ने इनमें से छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा। इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ-16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग-35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और डसॉल्ट एविएशन की रफाल विमान थे।
वायुसेना ने इन छह विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत को ध्यान में रखने हुए यूरोफाइटर और राफेल को छांटा। ये सबसे कम कीमत पर मिल रहा था और इसका रखरखाव भी आसान बताया जा रहा था।