फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राफेल डील पर सरकार की 'दस्तावेज गायब हो गए' थ्योरी में कितना दम?

Thu, 07 Mar 2019 02:16 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
राफेल डील पर खुलासा और सियासत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
राफेल सौदे पर नए ट्विस्ट ने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल ने बताया कि राफेल से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण फाइलें गायब हो गई हैं। लेकिन सरकार की यह थ्योरी कितना काम आएगी इस पर संशय है। अब सरकार पर ही सवाल उठ रहे हैं कि अगर दस्तावेज चोरी हो गए तो वह अब तक क्यों चुप रही और उसने क्या कार्रवाई की? अदालत को पहले ही क्यों नहीं बताया गया कि दस्तावेज चोरी हुए हैं और अब तक पुलिस में रिपोर्ट में दर्ज क्यों नहीं हुई?
विज्ञापन


अब इसी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर नए सिरे से हमला बोला है। उन्होंने कहा, अब नई लाइन सामने आ रही है..गायब हो गया। कागज गायब हो गए, इसका मतलब है कि ये सच्चे हैं। इनसे साफ है कि पीएम मोदी ने राफेल डील पर फ्रांस के साथ समानांतर बात की थी। 

क्या हुआ अदालत में?

अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार के पास इसका पुख्ता जवाब नहीं था कि अगर दस्तावेज गायब हुए हैं तो सरकार ने इस पर क्या कदम उठाया। द हिंदू में छपी रिपोर्ट का हवाला देते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस तरह की खबरें राफेल से जुड़े कुछ दस्तावेजों के चोरी होने के बाद प्रकाशित हुई हैं। 
विज्ञापन


अदालत में सरकार ने चेताया कि जो लोग सीक्रेट दस्तावेजों पर भरोसा कर रहे हैं और राफेल सौदे पर फैसला लेने की प्रक्रिया की जांच की मांग कर रहे हैं, वह दरअसल ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं जिसमें जेल की सजा या जुर्माना हो सकता है।   

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हम दस्तावेज चुराए जाने की जांच कर रहे हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि अभी हमने एफआईआर दर्ज नहीं की है। हम पता लगा रहे हैं इसे किसी पूर्व या मौजूदा कर्मचारी ने अंजाम दिया है। इसी के आधार पर हम अखबार, याचिकाकर्ता और रिपोर्टर के खिलाफ आगे की कार्रवाई करेंगे।   

 

शौरी-सिन्हा-प्रशांत हैं याचिकाकर्ता 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने संयुक्त रूप से राफेल मामले पर याचिका दाखिल की है कि सरकार ने अदालत से महत्वपूर्ण तथ्य छुपाए हैं। द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के साथ जो डील साइन की है वह यूपीए सरकार के दौरान साइन की गई डील के मुकाबले महंगी थी क्योंकि फ्रांस ने बैंक गारंटी देने से इनकार कर दिया था। 

एक न्यूज चैनल से बातचीत में हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के चेयरमैन एन राम ने सरकार के आरोप पर कहा कि राफेल पर जो भी खबरें प्रकाशित हुई हैं, वह देशहित में है। और किसी को इस बारे में कभी बताया नहीं जाएगा कि किसने ये जानकारी हम तक पहुंचाई है। हमने कुछ नहीं चुराया है। हमे ये विश्वसनीय सूत्रों से मिला है और हम अपने सूत्र का बचाव करेंगे। किसी को भी इस सूत्र के बारे में हमसे किसी तरह की जानकारी नहीं मिलेगी। 

अदालत में सुनवाई के दौरान उंगली प्रशांत भूषण पर भी उठी। हालांकि उन्होंने अदालत में कहा कि 2 जी और कोयला घोटाले पर महत्वपूर्ण खुलासे के लिए उन्होंने व्हिसल ब्लोअर से ही दस्तावेज लिए थे।  

 
विज्ञापन

नई मुश्किल में सरकार 

बहरहाल, राफेल से जुड़े दस्तावेज के चोरी होने की स्वीकारोक्ति ने सरकार को नई मुश्किल में डाल दिया है। अदालत ने जब पूछा कि इस पर क्या कार्रवाई हुई है, अटॉर्नी जनरल ने बस इतना कहा कि मामले में आंतरिक जांच चल रही है। एफआईआर दर्ज को लेकर कुछ नहीं कहा गया। इस नए खुलासे ने कांग्रेस को हमले का नया हथियार थमा दिया। अगले ही दिन 7 मार्च को राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर नए सिरे से हमला बोल दिया। अब सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो सकता है कि वह अब तक चुप क्यों रही। 

पुलवामा हमले और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद से देश का माहौल कुछ अलग ही नजर आ रहा था। नेता और जनता देशभक्ति से ओतप्रोत दिख रहे थे। लेकिन वक्त बीतने के साथ राफेल मामला फिर तूल पकड़ रहा है। सियासत का पुराना दौर शुरू हो चला है। सरकार और विपक्ष के बीच राफेल का मुद्दा गरजने लगा है। हालात बता रहे कि 2019 चुनाव में सर्जिकल स्ट्राइक, पाकिस्तान, आतंकवाद और सुरक्षा के साथ राफेल भी बड़ा मुद्दा होगा। जब तक चुनाव नहीं हो जाते राफेल पर सरकार और विपक्ष के बीच हर रोज तनातनी का एक नया दौर नजर आएगा। 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें