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राफेल डील: कैग रिपोर्ट और पीएसी संबंधित पैरा में संशोधन की मांग को लेकर कोर्ट पहुंची सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 15 Dec 2018 03:46 PM IST
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राफेल विमान

केंद्र ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर शीर्ष न्यायालय के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है। 

केंद्र सरकार द्वारा शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में दखिल आवेदन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 25 में गलती हुई है। केंद्र ने कहा कि राफेल की कीमत को लेकर हमने सीलबंद लिफाफे में जो जानकारी दी थी, उसमें केवल सीएजी की रिपोर्ट को पीएसी के पास भेजने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया था। हमने ये बिल्कुल नहीं कहा था कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी के साथ साझा की गई थी और रिपोर्ट को संसद में रखा गया था। हमने केवल प्रक्रिया की जानकारी दी थी। लेकिन अदालत को इसे समझने में गलती हुई है। 



अदालत ने फैसले में is (है) को has been (हो चुका) समझ कर लिख दिया है। इसी के कारण सरकार के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है। जिसकी वजह से विवाद उत्पन्न हो गया है। तो ऐसे में इस पैराग्राफ में बदलाव की आवश्यकता है। ऐसे में इस पैराग्राफ में बदलाव किया जाए और अगर आवश्यक हो तो इसके लिए आगे आदेश भी दिया जाए, ताकि विवाद को रोका जा सके। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को जल्द से जल्द देखने को कहा है। 
 
एक विधि अधिकारी ने बताया कि अदालत को अवगत कराने के लिए याचिका दायर की गयी है कि कैग और पीएसी से जुड़े मुहरबंद दस्तावेज के मुद्दे पर अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा था कि कैग के साथ कीमत के ब्यौरे को साझा किया गया और कैग की रिपोर्ट पर पीएसी ने गौर किया। कैग और पीएसी के मुद्दे के बारे में शीर्ष अदालत के फैसले के पैराग्राफ 25 में इसका जिक्र है। फैसले में कहा गया था कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई।

फैसले में कहा गया कि उसके सामने रखे गए साक्ष्य से पता चलता है कि केंद्र ने राफेल लड़ाकू विमान पर मूल्य के विवरणों का संसद में खुलासा नहीं किया, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के सामने इसे उजागर किया गया। 
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। 

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राफेल विमान
केंद्र ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर शीर्ष न्यायालय के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है। 

केंद्र सरकार द्वारा शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में दखिल आवेदन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 25 में गलती हुई है। केंद्र ने कहा कि राफेल की कीमत को लेकर हमने सीलबंद लिफाफे में जो जानकारी दी थी, उसमें केवल सीएजी की रिपोर्ट को पीएसी के पास भेजने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया था। हमने ये बिल्कुल नहीं कहा था कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी के साथ साझा की गई थी और रिपोर्ट को संसद में रखा गया था। हमने केवल प्रक्रिया की जानकारी दी थी। लेकिन अदालत को इसे समझने में गलती हुई है। 

अदालत ने फैसले में is (है) को has been (हो चुका) समझ कर लिख दिया है। इसी के कारण सरकार के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है। जिसकी वजह से विवाद उत्पन्न हो गया है। तो ऐसे में इस पैराग्राफ में बदलाव की आवश्यकता है। ऐसे में इस पैराग्राफ में बदलाव किया जाए और अगर आवश्यक हो तो इसके लिए आगे आदेश भी दिया जाए, ताकि विवाद को रोका जा सके। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को जल्द से जल्द देखने को कहा है। 
 
एक विधि अधिकारी ने बताया कि अदालत को अवगत कराने के लिए याचिका दायर की गयी है कि कैग और पीएसी से जुड़े मुहरबंद दस्तावेज के मुद्दे पर अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा था कि कैग के साथ कीमत के ब्यौरे को साझा किया गया और कैग की रिपोर्ट पर पीएसी ने गौर किया। कैग और पीएसी के मुद्दे के बारे में शीर्ष अदालत के फैसले के पैराग्राफ 25 में इसका जिक्र है। फैसले में कहा गया था कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई।

फैसले में कहा गया कि उसके सामने रखे गए साक्ष्य से पता चलता है कि केंद्र ने राफेल लड़ाकू विमान पर मूल्य के विवरणों का संसद में खुलासा नहीं किया, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के सामने इसे उजागर किया गया। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। 

विवाद की शुरुआत 

मल्लिकार्जुन खड़गे - फोटो : PTI
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेता और पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनके सामने ऐसी कोई रिपोर्ट कभी आई ही नहीं थी। इस फैसले के 24 घंटे के बाद ही कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी कानूनी पहलुओं पर सरकार को घेरा। उन्होंने फैसले के कई पैरा को पढ़ने के बाद शनिवार को कहा कि क्लीन चिट कहां दी गई है, जिसका दावा सरकार कर रही है। उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फाइलें नहीं मंगवाई और न ही नोटिंग देखी तो फिर क्लीन चिट मिलने जैसी बातें बचकानी हैं। 

सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कथित भ्रष्टाचार, कीमत, तकनीक आदि की जांच करने के लिए उचित अथॉरिटी नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि उसका अधिकार क्षेत्र सीमित नहीं है। इस बात को कहते हुए उन्होंने फैसले के 12वें, 15वें और 34वें पैरे का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि 'कोर्ट ने कहा है कि तकनीकी तौर पर क्या सही है, यह हम तय नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि हम कीमतों और तकनीक पर फैसला नहीं कर सकते हैं। प्रसीजर की जहां तक बात है तो राफेल एक दमदार प्लेन है।' 

वहीं, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देव ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुनिया में भारत की साख खराब करने के लिए 'साजिश रची' और फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे का विरोध किया। शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए देव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले ने साबित कर दिया कि केंद्र में भाजपा नीत राजग सरकार जवाबदेह और कल्याणकारी सरकार है। 

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा गिराने के लिए षड्यंत्र किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 10 साल तक कांग्रेस की स्थिर सरकार थी। राफेल समझौते को अंतिम रूप देने में वे नाकाम क्यों रहे? वे हमारे सैनिकों का मनोबल घटाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं? यह सब करने के लिए उन्हें किसने भड़काया है?'  देव ने कहा कि 'आधारहीन' सवाल उठाने के लिए राहुल गांधी को लोगों से माफी मांगनी चाहिए। 

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता और त्रिपुरा के कानून मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा, 'हमें लगता है कि यह विदेशी साजिश है। राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी में देरी करने के लिए यह बड़ी साजिश है। इसने भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल पैदा किया है।' कथित साजिश में कौन सा देश शामिल है, यह पूछे जाने पर नाथ ने कहा, 'मुझे नहीं पता कौन सा देश शामिल है। लेकिन विदेशी ताकतों की संलिप्तता है।' 

वहीं, मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कहा कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की जांच के लिए अगर संयुक्त संसदीय कमेटी का गठन हो तो सारी अनियमितता सामने आ जाएगी। टीपीसीसी अध्यक्ष बिरजीत सिन्हा ने कहा, 'हमने उच्चतम न्यायालय में मामला दाखिल नहीं किया क्योंकि हमारे नेता राहुल गांधी ने सही मांग की है कि अगर जेपीसी गठित हो तो सारी अनियमितता सामने आ जाएगी। हमारा मानना है कि राहुल गांधी ने सही रूख अपनाया है।' 
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