- 1.1 मिलियन यूरो के जो गिफ्ट दसॉल्ट की ऑडिट रिपोर्ट में मिला। क्या वो राफेल डील के लिए बिचौलिए को कमीशन के तौर पर दिए गए थे?
- जब दो देशों की सरकारों के बीच रक्षा समझौता हो रहा है, तो कैसे किसी बिचौलिये को इसमें शामिल किया जा सकता है?
- क्या इस सबके बाद राफेल डील सवालों के घेरे में नहीं आ गया?
- क्या इस पूरे मामले की जांच नहीं की जानी चाहिए, जिससे खुलासा हो कि डील के लिए किसको और कितने पैसे दिए गए?
- क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर जवाब देंगे?
देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में गड़बड़ी
सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस की जांच एजेंसी ने जब कंपनी की जांच की गई तो उसमें कमीशनखोरी के केस सामने आए। ऐसे में कांग्रेस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करती है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस पर बात करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में भारत और फ्रांस की दोनों सरकार की संलिप्तता बराबर की है।
कंपनी की ऑडिट में हुआ भ्रष्टाचार का खुलासा
गौरतलब है कि राफेल विमान की खेप भारत में आने शुरू हो गए हैं। लेकिन इसी बीच फ्रांस की एक वेबसाइट ने राफेल नाम से एक आर्टिकल छापे हैं। इसमें दावा किया गया है कि सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि राफेल लड़ाकू विमान डील में गड़बड़ी का सबसे पहले जानकारी 2016 में फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी AFA को हुई थी। AFA ने जांच में पाया कि विमान बनाने वाली कंपनी दसौल्ट ने एक बिचौलिए को 10 लाख यूरो देने पर सहमति जताई है। हालांकि जिस कंपनी को पैसा दिया गया है उसके दलाल एक अन्य हथियार सौदे में गड़बड़ी का आरोपी है।
बिल भारत की कंपनी के नाम पर हुआ तैयार
रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2018 में फ्रांस की भ्र्ष्टाचार निरोधक एजेंसी ने विमान तैयार करने वाली कंपनी का ऑड़िट किया । जिसमें कंपनी के 2017 के खातों की जाच का दौरान 'क्लाइंट को गिफ्ट' के नाम पर हुए 1 मिलियन यूरो के खर्च की जानकारी हाथ लगी। इस पर AFA ने इस खर्च का बिल मांगा तो दसॉल्ट एविएशन ने 30 मार्च 2017 का बिल उपलब्ध कराया। जिसमें भारत की एक कंपनी के नाम पर पैसा मुहैया कराने का उल्लेख है। पैसों का इस्तेमाल राफेल लड़ाकू विमान के 50 बड़े 'मॉडल' बनाने में हुआ। हालांकि यह मॉडल बन नहीं पाए। यह बिल राफेल लड़ाकू विमान के 50 मॉडल बनाने के लिए दिए ऑर्डर का आधे काम के लिए था।हर एक मॉडल की कीमत करीब 20 हजार यूरो से अधिक थी।