सरकार राफेल लड़ाकू विमान की कीमत को न जाहिर करने का कोई गोपनीय समझौता नहीं हुआ था। सरकार ऐसा करके देश को गुमराह कर रही है। एंटनी के मुताबिक 2012 में 126 लड़ाकू विमान लेने के लिए 526 करोड़ रुपये प्रति विमान इसकी कीमत तय की गई थी। एंटनी ने कहा कि इजिप्ट और कतर ने भी राफेल लड़ाकू विमान का सौदा किया है और उनकी कीमत वर्तमान सरकार द्वारा तय की गई कीमत से काफी कम है। मोदी सरकार की नई डील में प्रति लड़ाकू विमान की कीमत 1670 करोड़ रुपये है, यह एक घोटला है।
रक्षा मंत्री एके एंटनी के अनुसार उनके समय में हुए समझौते के तहत 126 लड़ाकू विमानों में से 18 विमान तैयार हालत में लिए जाने थे। शेष 108 विमानों को भारत में ही हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड और फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी द्वारा तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से तैयार किया जाना था। इसके लिए फ्रांस की कंपनी डेसाल्ट को भारत में सौदे की 50 फीसदी राशि निवेश करनी थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने न केवल पुराने समझौते को रद्द कर दिया बल्कि नए समझौते में तकनीकी हस्तांतरण का कोई जिक्र नहीं है। इतना ही नहीं सार्वजनिक क्षेत्र की हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड(एचएएल) को भी इस पूरी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
कांग्रेस का आरोप
सरकार राफेल लड़ाकू विमान सौदे में कीमत को छुपा रही है। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के अनुसार यह एक बड़ा घोटाला है। केंद्र सरकार ने इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचएएल को बाहर करके प्रधानमंत्री के करीबी उद्योगपति को लाभ पहुंचाया है। सुरजेवाला और आनंद शर्मा का कहना है कि सरकार को लड़ाकू विमान की कीमत बतानी चाहिए। लोकिन दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है। इसलिए सरकार चुप है। वह कीमत बताने के नाम पर गोपनीयता समझौते की आड़ लेकर झूठ बोल रही है।
कांग्रेस पार्टी को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का साथ मिल गया है। दोनों का कहना है कि यदि विमान की कीमत बताना गोपनीयता समझौते का उल्लंघन है तो सरकार ने इससे पहले क्यों इसकी कीमत बताई? संजय सिंह का कहना है कि उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान की कीमत के बारे में पूछा था। इसमें उन्हें रक्षा मंत्री ने बिना इक्विपमेंट के लड़ाकू विमान की कीमत 670 करोड़ रुपये बताई है।
यह कीमत मार्च 2018 में बताई गई है। जबकि डेसाल्ट कंपनी की सालाना रिपोर्ट में विमान की कीमत 1670 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके बरअक्स सरकार ने 18 नवंबर 2016 को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान रक्षा राज्य मंत्री डा. सुरेश भामरे ने जानकारी देते हुए बताया था कि 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस और भारत सरकार के बीच में 36 राफेल विमान खरीदने का समझौता हुआ है। इसमें प्रत्येक राफेल विमान की लागत लगभग 670 करोड़ रुपए (उपकरणों के साथ) है और भामरे के अनुसार साल 2022 तक सभी राफेल विमानों की सप्लाई कर दी जाएगी।