साहित्य को देश से लेकर अंतराराष्ट्रीय स्तर तक नई पहचान दिलाने वाले पहले नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की आज 158वीं जयंती है। यूं तो उनका जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता में जोरासंको हवेली में हुआ था। लेकिन बांग्ला पंचांग के अनुसार वैशाख की 25 तारीख को उनका जन्म हुआ था, जो इस बार 9 मई को पड़ी है। वह सिर्फ एक कवि ही नहीं बल्कि संगीतकार, चित्रकार और लेखक भी थे। चलिए जानते हैं उनसे जुड़ी रोचक बातें:
- रवींद्रनाथ टैगोर ऐसे पहले शख्स थे जिनकी रचनाओं को दो देशों में राष्ट्रगान के रूप में गाया जाता है। इनमें एक है भारत का जन गण मन... और दूसरा है बांग्लादेश का अमार शोनार बांग्ला...। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने हजारों गीतों की रचना की है।
- टैगोर की कही कुछ बातें ऐसी हैं जो आज भी लोगों को प्रेरणा देती हैं। वह कहा करते थे कि केवल पानी पर खड़े होकर या उसे देखकर समुद्र पार नहीं किया जाता। इसे पार करने के लिए कदम बढ़ाना होगा। विश्वास को जीवन में अहम मानते हुए वह कहते थे कि ये (विश्वास) वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में प्रकाश का अनुभव कराता है और गाने लगता है।
- टैगोर की लोकप्रिय किताबों में से एक 'द किंग ऑफ द डार्क चैंबर' भी है। जिसकी बीते साल अमेरिका में सात सौ डॉलर (करीब 45 हजार रुपये) में नीलामी हुई है। ये किताब 1916 में मैकमिनल कंपनी ने प्रकाशित की थी, जो टैगोर के हिंदी में लिखे नाटक 'राजा' का अंग्रेजी अनुवाद है। इस नाटक की कहानी एक रहस्यमय राजा से जुड़ी है।
- पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में कला और साहित्य का एक अलग रूप दिखता था। इससे टैगोर का गहरा नाता था। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां उनके पिता ने 1863 में ब्रह्मो समाज आश्रम और विद्यालय के रूप में एक आश्रम की स्थापना की थी। फिर यहीं पर रवींद्रनाथ टैगोर ने विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की।