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Jairam Ramesh: ‘वन विधेयक पर मुहर लगाने वाली सरकार से पूछें सवाल’, विपक्ष की आलोचना पर कांग्रेस का पलटवार

Thu, 03 Aug 2023 12:13 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कई पर्यावरणविद वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में संशोधन के समय राज्यसभा का बहिष्कार करने के लिए विपक्ष की आलोचना कर रहे हैं। इस पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सफाई देते हुए कहा कि यह 26 पार्टियों का फैसला था।
 
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Congress Leader Jairam Ramesh - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि सरकार और उन पार्टियों से सवाल पूछा जाना चाहिए, जिन्होंने वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 पर मुहर लगाई है। साथ ही उन्होंने कहा कि वनवासियों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए यह एक लंबा संघर्ष होगा।

यह है मामला

बता दें, मणिपुर मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के विरोध और उनके बहिर्गमन के बीच राज्यसभा ने बुधवार को एक संक्षिप्त बहस के बाद वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 पारित कर दिया। विधेयक में देश की सीमाओं के 100 किलोमीटर के भीतर की भूमि को संरक्षण कानूनों के दायरे से छूट देने और वन क्षेत्रों में चिड़ियाघर, सफारी और इको-पर्यटन सुविधाओं की स्थापना की अनुमति देने का प्रावधान है। बता दें, लोकसभा इस विधेयक को 26 जुलाई को पारित कर चुकी है।

विपक्ष की आलोचना पर बोले रमेश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा कि कई पर्यावरणविदों, जो किसी भी तरह से भक्त नहीं हैं ने वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में संशोधन के समय राज्यसभा का बहिष्कार करने के लिए विपक्ष की आलोचना की है। साथ ही इसके खिलाफ कई लोग आंदोलन कर रहे हैं, कल उस पर चर्चा हो रही थी।

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जानें क्या कुछ कहा-

उन्होंने कहा कि मैं कुछ बिंदुओं में स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमने राज्यसभा का बहिष्कार करने का फैसला क्यों लिया। 

1. रमेश ने कहा कि बहिष्कार का निर्णय भारत की 26 पार्टियों का सामूहिक निर्णय था क्योंकि मणिपुर पर प्रधानमंत्री के बोलने की हमारी जायज मांग को रोजाना अस्वीकार किया जा रहा है। साथ ही विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

2. उन्होंने आगे कहा कि विधेयक को स्थायी समिति या अध्यक्ष के पास नहीं भेजा गया था। इसे एक विशेष संयुक्त समिति के पास भेजा गया, जिसने विधेयक पर बस मुहर लगा दी। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया का पूरी तरह से मजाक उड़ाया गया।

3. कांग्रेस नेता ने कहा कि संशोधनों के खिलाफ हमने कई बार आवाज उठाई है और आगे भी अपनी बात रखते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं वह बहुत बड़ी राजनीतिक स्तर पर है। कभी-कभी किसी बड़े मुद्दे पर वैध और सैद्धांतिक रुख का किसी विशिष्ट मुद्दे पर परिणाम हो सकता है।

4. उन्होंने कहा कि इस सरकार और यहां तक कि अन्य पार्टियों से भी सवाल पूछे जाने चाहिए, जिन्होंने इस विधेयक पर मुहर लगाई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, आदिवासियों और वनवासियों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए यह एक लंबा संघर्ष होगा और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि विपक्ष इस मुद्दे पर कहां खड़ा है।

 

 

 

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