प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मौजूद नहीं थीं। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हैरानी जाहिर की गई। सोमवार को सुषमा स्वराज दिल्ली में ही थीं। उड़ी हमले के बाद जवाबी विकल्पों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई।
इस बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर परिकर, एनएसए अजित डोभाल, सेना प्रमुख दलबीर सिंह, आईबी और रॉ के मुखिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। खास बात यह भी थी कि बैठक में पाक से कूटनीतिक रिश्तों को तोड़ने या कम करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जो कि सीधे विदेश विभाग से संबंधित मामला है।
इतना ही नहीं, सुषमा स्वराज 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा की बैठक में शिरकत करेंगी, जहां वह पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने की मांग करेंगी। वह वहां उड़ी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत भी तमाम देशों के नेताओं के सामने रखेंगी। ऐसे में बैठक में सुषमा को न बुलाए जाने पर सवाल उठना लाजिमी है।
ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से फोन पर बात की थी और भरोसा दिलाया था कि उनका देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने उड़ी आतंकी हमले की कड़ी निंदा भी की थी।