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जलपरी की काबलियत पर सवाल, ''फेल्प्स के बूते की भी नहीं यह रफ्तार''

Sun, 04 Sep 2016 03:09 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
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जलपरी श्रद्घा शुक्ला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ओलंपिक में 21 स्वर्ण पदक विजेता अमेरिका के माइकल फेल्प्स दो सौ मीटर की तैराकी 1.54.66 मिनट में पूरा कर रिकार्ड बनाते हैं। वह इसी गति से रोजाना 13 घंटे से अधिक समय तक तैराकी करते हैं तो 570 किलोमीटर का सफर सात दिन में तय कर सकते हैं। लेकिन तैराक प्रशिक्षकों का मानना है कि जैसे-जैसे दूरी बढ़ेगी तैरने की रफ्तार कम हो जाएगी। कम दूरी को पूरा करने में तैराक अपनी अधिकतम क्षमता का इस्तेमाल करता है। लेकिन वह ऐसा कुछ मिनट ही कर सकता है। इसलिए कानपुर की जलपरी के अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 
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तैराकी के विशेषज्ञ यह मानते हैं कि कोई भी तैराक इतनी देर तक लगातार तैराकी नहीं कर सकता है। 81 किलोमीटर की दूरी तय करना मुश्किल है। कानपुर की 12 साल की जलपरी श्रद्धा शुक्ला के लिए तो बहुत ही मुश्किल है। उसने तो तैराकी में किसी तरह का प्रशिक्षण भी नहीं लिया है। उसकी रफ्तार भी फेल्प्स के बराबर नहीं हो सकती है।

यमुना वोट क्लब के वॉटर स्पोर्ट्स प्रशिक्षक त्रिभुवन सिंह निषाद कहते हैं कि इस रफ्तार से लगातार 81 किलोमीटर फेल्प्स भी नहीं तैर सकते हैं, जलपरी की तो बात ही छोड़िए। यह व्यावहारिक रूप से भी सच नहीं लगता है। जार्ज टाउन स्थित तरणताल के तैराक प्रशिक्षक नरेश निषाद कहते हैं कि 81 किमी लगातार तैरना किसी भी तैराक के लिए मुमकिन नहीं है। जिला तैराकी एसोसिएशन के सचिव विकास श्रीवास्तव कहते हैं कि बाढ़ के पानी में तैरना आसान है। तैरने की रफ्तार भी तेज हो सकती है, लेकिन 12 साल की बच्ची के लिए इतनी लंबी दूरी तय करने वाली बात सवाल खड़े करती है।
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'जलपरी' के 570 किमी तैरने की दावे की जांच करेंगे कानपुर के डीएम

- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
उ.प्र. बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जलपरी के रूप में प्रचारित की गई श्रद्धा शुक्ला के मामले की जांच कानपुर डीएम को करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने उन्हें पता लगाने को कहा है कि क्या वह सच में सात दिन के अंदर गंगा में तैर कर कानपुर से वाराणसी तक अलग-अलग भाग में 570 किमी की यात्रा पूरी कर रही है या फिर उसके पिता झूठा प्रचार करके पैसा कमाने के लिए यह सब कर रहे हैं।

एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता विनोद कापड़ी ने इलाहाबाद में यह आरोप लगाया था कि श्रद्धा शुक्ला के तैर कर कानपुर से वाराणसी जाने की बात उसके पिता द्वारा प्रचारित की जा रही है, लेकिन यह झूठ है।

श्रद्धा को नदी में थर्माकोल की शीट व नाव के सहारे आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, जनता के सामने आने पर उसे नदी में उतार दिया जा रहा है। कापड़ी ने इसके साक्ष्य के तौर पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रस्तुत की है।

इसका संज्ञान लेते हुए आयोग की सदस्य नाहिद लारी खान ने लखनऊ में कहा, ''डीएम यह भी जांच करेंगे कि कापड़ी कहीं श्रद्धा के खिलाफ डॉक्यूमेंट्री के जरिए कोई साजिश तो नहीं कर रहे हैं?''
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