जर्नादन द्विवेदी, मोहन प्रकाश, बीके हरिप्रसाद, सीपी जोशी भी पार्टी के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से अलग कर दिया गया है। जर्नादन द्विवेदी को हटाने की सूचना उन्हीं के हस्ताक्षर से जारी हुई। लेकिन उन्हें यह विदाई पसंद नहीं आई। उनके समर्थकों की मानें तो द्विवेदी ने राहुल से खुद ही पद छोड़ने की पेशकश की थी। वह मानकर चल रहे थे कि पार्टी उन्हें सम्मानजनक तरीके से कोई और जिम्मेदारी दे देगी। अंबिका सोनी से भी कई राज्यों की जिम्मेदारी लेने के बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर से जोड़े रखा गया है।
कर्नाटक के नेता बीके हरिप्रसाद एक समय कई राज्यों के प्रभारी थे। उन्हें हटाने का फैसला ऐसे समय हुआ, जब वह राज्य के चुनाव में राहुल संग प्रचार में जुटे थे। उन्हें अचानक दिल्ली से हटाए जाने की सूचना मिली। सीपी जोशी से पहले ही कई राज्यों का प्रभार ले लिया गया था। उनसे आखिरी राज्य भी ऐसे समय छीन लिया गया है, जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। उनके समर्थकों की मानें तो जोशी खुद राज्य की राजनीति में लौटना चाहते हैं। कभी राहुल के करीबी रहे दिग्विजय सिंह की राज्य में वापसी को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।