तालिबानियों के सत्ता पर काबिज होने के बाद कतर दुनिया का पहला देश बना है, जिसने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान का दौरा किया है। कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल तहानी तालिबानियों की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री अखुंद की गुजारिश पर काबुल पहुंचे। इस दौरान काबुल में कतर के विदेश मंत्री और तालिबानियों के बीच सबसे बड़ा फैसला यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किये जाएंगे। विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि कतर शुरुआत से तालिबानियों की पैरवी करता आया है इसलिए यह दौरा कोई खास मायने नहीं रखता है।
तालिबान सरकार और कतर के विदेश मंत्री के बीच हुई बैठक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही उतना महत्त्व नहीं दिया जा रहा हो लेकिन अफगानिस्तान इसमें बहुत संभावनाएं ढूंढ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरीके से पूरी दुनिया ने तालिबान का अभी तक बॉयकाट किया है उस दौर में क़तर का दौरा न सिर्फ बहुत अहम है बल्कि दुनिया के सामने अपनी सरकार को मान्यता दिलाने का एक बहुत बड़ा जरिया भी मान रहा है। विदेश मामलों की जानकार दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर सुषमा कहती हैं कि कूटनीतिक तौर पर कतर का दौरा अफगानिस्तान के लिए न सिर्फ जैकपॉट जैसा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसको मान्यता दिलाने के लिए भी बड़ा रास्ता खोलने जैसा नजर आ रहा है। हालांकि इसकी सच्चाई अभी पता नहीं चल सकती है कि क्या वास्तव में कतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान की सिफारिश करेगा या नहीं।