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कुकुरमुत्ते की तरह फैल रहे कोचिंग सेंटर, नियंत्रण को बने ठोस नीति: SC

Sat, 04 Feb 2017 06:05 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SELF
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कुकुरमुत्ते की तरह फैल रहे निजी कोचिंग संस्थानों पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से निजी कोचिंग संस्थानों के कामकाज पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से कारगर नीति लाने के लिए कहा है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी कोचिंग संस्थानों की बाढ़ आ गई है। ऐसा लगता है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण हो रहा है, जो सही नहीं है। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह निजी कोचिंग संस्थानों को रेग्यूलेट करने के लिए कोई ठोस व कारगर नीति लेकर आए।

पीठ ने कहा कि हम निजी कोचिंग संस्थानों को बंद करने का तो आदेश नहीं दे सकते हैं लेकिन इन संस्थानों को रेग्यूलेट करना जरूरी है। खासकर इसके व्यवसायीकरण पहलू को लेकर। पीठ ने दो टूक कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए।
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रिहायशी इलाकों में कोचिंग पर पहले ही जताई थी आपत्ति 

पीठ स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी कहा कि मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं का एक ही आधार न हो। पीठ ने कहा कि प्रवेश परीक्षा के साथ-साथ स्कूल के रिजल्ट को भी तवज्जो मिलनी चाहिए। पीठ ने कहा कि मेडिकल और इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिले में प्रवेश परीक्षा के परिणाम को 60 फीसदी और स्कूल के रिजल्ट को 40 फीसदी तवज्जो मिलनी चाहिए। हालांकि पीठ ने कहा कि आधार हम नहीं तय कर सकते। यह सरकार का काम है, लिहाजा वह नीति लाकर आधार तय करे।

इससे पहले गत वर्ष निजी कोचिंग संस्थानों से संबंधित एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोचिंग इस्टीट्यूट को रिहायशी इलाकों में नहीं होना चाहिए। अदालत ने साफ कहा कि इस ...तमाशे...की इजाजत नहीं दी जा सकती। लोग कोचिंग संस्थान रिहायशी इलाके में खोल लेते हैं, जिससे वह इलाका सार्वजनिक स्थल बन जाता है। कोचिंग संस्थानों के कारण इलाकों को भीड़भाड़ बढ़ जाती है। वहां शोरगुल होता है। लड़के मटरगस्ती करते हैं। जिससे कि स्थानीय निवासी खासकर, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी होती है। ऐसे इलाकों की शांति खत्म हो जाती है।  
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