फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुतिन का भारत दौरा: ब्रह्मोस, सुखोई से लेकर एस-400 तक कई समझौते करेंगे भारत-रूस; क्या बढ़ेगी रक्षा साझेदारी?

सार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे में रक्षा से जुड़े कई बड़े समझौते होने की उम्मीद है। ब्रह्मोस, सुखोई-57 और एस-400 जैसे मुद्दे चर्चा में रहेंगे। ऊर्जा और परमाणु सहयोग पर भी बात होगी, क्या रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती? पढ़िए रिपोर्ट
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत दौरे पर हैं। उनकी भारत यात्रा का केंद्रीय आकर्षण भारत-रूस रक्षा सहयोग होने जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात में रक्षा, ऊर्जा और स्वतंत्र विदेश नीति के मोर्चे पर कई बड़े फैसले होने की उम्मीद है। रक्षा गलियारों में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह यात्रा किस तरह दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को नए पायदान पर ले जाएगी।  
विज्ञापन


सामरिक सौदे
प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे में रक्षा सहयोग सबसे ऊपर है। रूस के साथ इस संभावित रक्षा सौदे और तकनीक हस्तांतरण पर होने वाली ठोस प्रगति से सैन्य तैयारियों को एक नया आयाम मिलेगा। 
  • सुखोई-57: रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के इन विमानों की पेशकश कर रहा है, दोनों पक्ष संभावित खरीद और तकनीक हस्तांतरण पर बातकर रहे हैं 
  • ब्रह्मोस का अगला संस्करण: दोनों देश ब्रह्मोस के उन्नत संस्करण पर चर्चा कर रहे हैं 
  • एस-400: एस-400 वायु रक्षा प्रणाली से जुड़े आगामी समझौते भी महत्वपूर्ण हैं 
  • रक्षा उत्पादन व तकनीक हस्तांतरण: दोनों देश पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़ संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर जोर दे रहे हैं 
  • महत्वपूर्ण खनिज: दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों, खनन, प्रसंस्करण और आपूर्ति शृंखला में सहयोग पर समझौता करेंगे

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग
पुतिन की यात्रा का दूसरा बड़ा स्तंभ ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग होगा। पश्चिमी देशों के तमाम दबावों के बावजूद दोनों देशों के बीच कच्चे तेल का व्यापार और ऊर्जा साझेदारी मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रपति पुतिन की इस यात्रा के दौरान भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से जुड़ी वार्ताओं को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है। इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक समझौतों पर भी मुहर लग सकती है। 
विज्ञापन


पश्चिमी दबाव के बीच स्वायत्तता
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब रूसी कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि मॉस्को ने रूसी तेल की खरीद पर लगाए जाने वाले अमेरिकी शुल्कों या पाबंदियों की धमकियों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अस्वीकार किया है। राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा इस बात का स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों के मामलों में अडिग है। ब्रिक्स ढांचे के भीतर डॉलर पर निर्भरता कम करने और आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में निपटाने की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। यह कदम वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। 

भविष्य की दिशा
यह यात्रा इस बात की परीक्षा है कि कैसे दो देश भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को उन्नत बनाए रख सकते हैं। रक्षा सौदों की नींव, ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच स्वतंत्र कूटनीति का यह मेल भारत-रूस रिश्तों को और मजबूत और व्यावहारिक रूप देगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें