बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेड़ीवाला पॉक्सो कानून को लेकर दिए गए अपने फैसले से अचानक चर्चित हो गई हैं। न्यायमूर्ति पुष्पा छात्र जीवन में काफी मेधावी रही हैं। वह बी.कॉम, एलएलबी और एलएलएम में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं।
जस्टिस पुष्पा गनेड़ीवाला ने पहले ही प्रयास में नेट-सेट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद विदर्भ के अमरावती जिले में बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस शुरू की। वह कई बैंक और वीमा कंपनियों के पैनल की अधिवक्ता भी रही। इसके अलावा अमरावती के विभिन्न कालेजों में एमबीए और एलएलबी की मानद व्याख्याता थी। यह पहली बार नहीं है कि वह मीडिया की सुर्खियों में आई है।
जस्टिस पुष्पा के ऐसे चार फैसले हैं जिसको लेकर समाजिक, राजनीतिक और कानूनी हलके में वह चर्चा का केंद्रविंदु बनी हैं। जस्टिस पुष्पा गनेड़ीवाला द्वारा यौन शोषण के मामले में दिए गए वह चार फैसले हैं जिससे वह चर्चित हुई हैं। उन्होंने बीते दिनो यौन शोषण के चार मामले में फैसला सुनाया है कि कपड़े के ऊपर से बच्ची का सीना दबाना और इस दौरान शारीरिक संपर्क यानी स्किन का स्किन से न छूना, पैंट उतारना या नाबालिग का हाथ पकड़ना, एक आदमी के लिए एक लड़की का गला दबाना, उसे निर्वस्त्र करना, खुद को निर्वस्त्र करना और फिर हाथापाई के बिना 15 साल की लड़की का दुष्कर्म करना बेहद असंभव है। अपने फैसले में उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह पॉक्सो कानून के तहत यौन हमले की श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए इसे यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता।
साल 2007 में सीधे जिला जज पद पर नियुक्ति
साल 1969 में अमरावती जिले के परतवाड़ा गांव में जन्मी जस्टिस पुष्पा गनेड़ीवाला को साल 2007 में मुंबई सिविल कोर्ट में सीधे जिला जज के रूप में नियुक्ति दी गई। नागपुर में जिला न्यायालय और कुटुंब न्यायालय, महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी (एमजेए) की संयुक्त निदेशक, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और नागपुर में रजिस्ट्रार जनरल रहीं। उन्हें 13 फरवरी 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और बाद में नागपुर पीठ में नियुक्त हुईं।