सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता अधिकारों को ‘अहम अधिकार’ बताया है। कोर्ट का कहना है कि देशभर में राज्य और जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोगों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव तथा खाली पदों के चलते लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान से वंचित रहना पड़ रहा है।
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें जिला एवं राज्य उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोगों में अध्यक्ष, सदस्य एवं कर्मचारियों के पदों पर नियुक्ति करने तथा इन आयोगों को संचालित करने के लिए आवश्यक ढांचे की कमी को दूर करने में सरकार की कथित निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया है।
पीठ ने कहा कि याचिका में उठाया गया मामला अहम है लेकिन याचिकाकर्ता की याचिका में पर्याप्त कार्य नहीं दिख रहा है। याचिका एक विधि छात्र ने दायर की है। पीठ ने कहा कि हमने मामले पर गौर किया और यह मुद्दा काफी अहम है। मात्र सामग्री जुटाने में ढिलाई बरते जाने के चलते इसे खारिज नहीं किया जा सकता है।
पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई करना हमें उचित लगा। पीठ ने इस मामले में मदद के लिए वकील गोपाल शंकर नारायणन और वकील आदित्य नारायण को न्याय मित्र नियुक्त किया।