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Puri Railway Station: नए सिरे से संवारा जाएगा ऐतिहासिक पुरी स्टेशन, जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला की झलकी दिखेगी

Sun, 14 Jan 2024 08:22 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी (ओडिशा)

सार

धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों के स्टेशन पर आने वाले पर्यटकों को नया एहसास दिलाने की कवायद हो रही है। रेल मंत्रालय ने पुरी रेलवे स्टेशन को पुनर्विकसित करने का जिम्मा करीब डेढ़ साल पहले दिया। इसमें जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला और विशेषताओं की झलक दिखेगी।
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रेलवे स्टेशन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पुरी रेलवे स्टेशन चार धामों में गिने जाने वाले आस्था के वैश्विक केंद्र- जगन्नाथ मंदिर की पारंपरिक वास्तुकला विशेषताओं को प्रतिबिंबित करेगा। ये कहना है स्टेशन को नए सिरे से डेवलप कर रही कंपनी का। कंपनी के मुताबिक रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी शानदार एहसास दिलाने वाली सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। बता दें कि करीब डेढ़ साल पहले भारतीय रेलवे ने स्टेशन के पुनर्विकास का ठेका दिया था। जुलाई 2022 में रथ आर्किटेक्चरनिक को निर्माण कार्य का जिम्मा मिला। काम जनवरी 2023 में शुरू हुआ।
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स्टेशन पुनर्विकास परियोजना पर काम कर रही कंपनी- रथ आर्किटेक्चरनिक के मुताबिक जुलाई, 2024 तक काम पूरा होने की उम्मीद है। स्टेशन का पुनर्निर्माण कलिंग वास्तुकला के अनुसार किया जा रहा है। कलिंग वास्तुकला ईसा पूर्व चौथी शताब्दी से जुड़ी है। कंपनी के अधिकारी प्रतीक रथ ने बताया कि वास्तुकला की कलिंग शैली का जीवंत उदाहरण जगन्नाथ मंदिर भी है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक महत्व वाले शहर में रेलवे स्टेशन का बाहरी हिस्सा मंदिर को प्रतिबिंबित करेगा।

पौराणिक महत्व वाले शहर पुरी में रेलवे स्टेशन पर अत्याधुनिक सुविधाओं को विकसित कर रही फर्म से जुड़े मनोंजय रथ ने बताया, कलिंग वास्तुकला में, मूल रूप से एक मंदिर दो भागों में बनाया जाता है। एक टावर और एक हॉल होता है। टावर को 'देउला' कहा जाता है और हॉल को 'जगमोहन' कहा जाता है। पुनर्विकसित स्टेशन के डिजाइन में पुरी रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार को 'देउला' और पिछले हिस्से को 'जगमोहन' की अवधारणा पर बनाया जा रहा है। 18 मीटर ऊंची इस संरचना का दायरा 115 मीटर गुणा 30 मीटर होगा।
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स्टेशन के डिजाइन में कलिंग मंदिर वास्तुकला में इस्तेमाल की गई स्थानीय सामग्रियों और प्राकृतिक पत्थर को अपनाया गया है। मनोंजय रथ के मुताबिक कलिंग वास्तुकला की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में एक- पत्थर का उपयोग है। पास की पहाड़ियों से निकाले गए पत्थरों की कटाई और पॉलिश के बाद इनसे मूर्तियां बनाई गईं। नक्काशी और वास्तुशिल्प की मदद से कई और सांस्कृतिक पहचान वाले चिह्न उकेरे जा रहे हैं। स्टेशन पर संरचनाएं बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट और लेटराइट जैसे विभिन्न पत्थरों के संयोजन से बनाई गईं। इसे पुरी रेलवे स्टेशन के डिजाइन में शामिल किया गया है।

प्रतीक रथ के मुताबिक, आज से 40 से 50 साल बाद यात्रियों की संख्या कितनी हो सकती है? इस अनुमान को ध्यान में रखते हुए स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है। अभी लगभग 6-7 हजार यात्री प्रतिदिन स्टेशन पर आते हैं। साल 2060-65 में यात्रियों की अनुमानित संख्या लगभग 40 हजार है। ऐसे में पुनर्विकास के बाद क्षमता 40 हजार तक बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि पुनर्विकास का मकसद स्टेशन को स्मारक जैसा विकसित करना है। जो लोग जगन्नाथपुरी मंदिर में दर्शन करने आएं, वे शहर छोड़ते समय स्टेशन की भव्यता और याद लेकर जाएं।

आने वाले दिनों में स्टेशन तीन मंजिलों का होगा। विश्व स्तरीय सुविधाओं में सुविधाजनक और विशिष्ट पार्किंग, कम बिजली और ऊर्जा खपत वाले भवन (energy-efficient building) भवन, स्वचालित टिकट काउंटर के साथ-साथ वेटिंग लाउंज की सुविधाएं भी शामिल होंगी। सुरक्षा के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के हर छोटे पहलू को ध्यान में रखा गया है। 

समुद्र के करीब होने के कारण पुरी स्टेशन चक्रवात के मद्देनजर भी बेहद संवेदनशील है। इसे भी ध्यान में रखा जाएगा। पूरी संरचना ऐसी है कि इमारत पर 250 से 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा का असर भी नहीं होगा। स्टेशन के अंदरूनी हिस्सों में प्राकृतिक रोशनी का इंतजाम चुनौती है। संरचनात्मक रूप से सुरक्षित इंतजाम करने का प्रयास हो रहा है। 
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मनोंजय रथ और प्रतीक रथ की डिज़ाइन पर पुनर्निमाण बी सी भुयान कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कर रही है।
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