सूत्रों के मुताबक, पाकिस्तान के बालाकोट में भारत की एयर स्ट्राइक के दौरान अवाक्स विमानों की तैनाती से मिली सफलता के बाद इस प्रणाली वाले विमान बढ़ाने का निर्णय लिया गया। डीएसी ने अवाक्स प्रणाली वाले कम से कम दो विमानों की खरीद को मंजूरी दी है।
इस अवाक्स प्रणाली के लिए मिशन सिस्टम और सब-सिस्टम को डिजाइन, विकसित व मुख्य प्लेटफार्म (ब्राजील निर्मित एंब्रियर विमान) पर एकीकृत करने की जिम्मेदारी रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) की रहेगी यानी यह पूरी तरह स्वेदशी प्रणाली होगी।
फिलहाल भारत के पास इस्राइल और रूस की मदद से मिले तीन अवॉक्स विमान हैं, जिन्हें नेत्रा नाम दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन अवाक्स को शामिल करने से भारतीय वायुसेना की कवरेज का दायरा बढ़ेगा और उसकी रक्षा व आक्रमण क्षमता में बढ़ोतरी होने से वह अजेय सरीखी हो जाएगी।
अंधेरे में भी सटीक निशाना लगा सकेंगे सैनिक
डीएसी ने थल सेना की असॉल्ट राइफलों के लिए भी ‘थर्मल इमेजिंग नाइट साइट्स’ की खरीद का निर्णय लिया है। इनका विकास और निर्माण स्वदेश में ही भारतीय निजी रक्षा उद्यमों द्वारा किया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि इन्हें सीमा पर मोर्चे की पहली पंक्ति में मौजूद जवानों को दिया जाएगा। इससे भारतीय सैनिकों को घने अंधेरे और सभी तरह की मौसमी परिस्थितियों में लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में मदद मिलेगी।