कुछ कार्यकर्ताओं और कलाकारों ने सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को 25 सितंबर के दिन अपना समर्थन देने का निर्णय लिया। पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू भी उन्हीं कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने किसानों के साथ धरने पर बैठने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने स्थायी तौर पर धरना देने का निर्णय लिया। दीप सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों से किसानों की समस्या को उठाने की अपील की।
सनी देओल को देनी पड़ी सफाई
पिछले लोकसभा चुनाव में दीप ने गुरदासपुर से भाजपा सांसद और बॉलीवुड एक्टर सनी देओल के लिए चुनाव प्रचार किया था। हालांकि, लाल किले पर हुई हिंसक घटना के बाद सनी देओल ने एक ट्वीट करते हुए कहा 'मेरा या मेरे परिवार का दीप सिद्धू से कोई संबंध नहीं है। ' देओल ने कहा, "आज लाल किले पर जो हुआ, उसे देख कर मन बहुत दुखी हुआ है। मैं पहले भी, 6 दिसंबर को ट्वीट कर स्पष्ट कर चुका हूं कि मेरा या मेरे परिवार का दीप सिद्धू के साथ कोई संबंध नही है। जय हिन्द।"
प्रधानमंत्री के साथ फोटो वायरल
पिछले लोकसभा चुनाव में दीप ने गुरदासपुर से भाजपा सांसद और बॉलीवुड एक्टर सनी देओल के लिए चुनाव प्रचार किया था। दीप सिद्ध् की भाजपा से नजदीकी की बात कहकर अब सोशल मीडिया पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह व सांसद सनी देओल के साथ तस्वीरें वायरल कर दी गई हैं। कीर्ति किसान यूनियन के उपाध्यक्ष रजीन्दर सिंह दीपसिंह वाला ने बताया कि केंद्र सरकार शुरू से ही किसान आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देना चाहती थी। दीप सिद्धू ने उनकी अच्छी सेवा की है।
दीप सिद्धू किसान आंदोलन में लगातार दो महीनों से सक्रिय हैं। कुछ दिन पहले दीप को सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे ) के साथ रिश्तों को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए ) ने नोटिस भी जारी किया था। दीप ने पिछले साल आंदोलन के दौरान किसान यूनियन की लीडरशिप पर सवाल उठाया था। उस दौरान उन्होंने शंभु मोर्चा के नाम से नए किसान संगठन की घोषणा भी की थी। तब उनके मोर्चा को खालिस्तान समर्थक चैनलों से समर्थन भी मिला था।
दीप सिद्धू ने स्वीकारी लाल किले पर झंडा फहराने की बात
इस बीच, दीप सिद्धू ने फेसबुक पर एक वीडियो जारी कर कहा कि लाल किला पर निशान साहिब का झंडा तो उन्होंने ही फहराया है, लेकिन राष्ट्र ध्वज नहीं हटाया। साथ ही अपने ऊपर लगे आरोपों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ संगठनों के नेताओं ने तय रूट फॉलो नहीं करने की बात पहले ही कही थी, लेकिन भारतीय किसान यूनियन ने इसे नजरंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि केवल एक प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर 'निशान साहिब' को लगाया था। बता दें कि निशान साहिब' सिख धर्म का प्रतीक है और इस झंडे को सभी गुरुद्वारा परिसरों में लगाया जाता है।
बता दें कि किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में हिंसक झड़पें भी हुईं। ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और कार पर सवार सैकड़ों किसान हाथों में तिरंगा और अन्य झंडे लेकर लाल किला परिसर में घुस गए। सुरक्षा बलों और पुलिस कर्मियों की संख्या से अधिक संख्या में किसान जल्द ही स्मारक की प्राचीर पर चढ़ गए और वहां अपना परचम लहराया। राजधानी के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को भड़की हिंसक झड़पों में दर्जनों पुलिसकर्मी और कई किसान घायल हो गए। आईटीओ चौराहे के पास ट्रैक्टर पलटने के चलते एक किसान की मौत हो गई।