सतलज यमुना लिंक(एसवाईएल) नहर मामले में पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जिन भू-मालिकों को जमीन वापस कर दी गई हैं, उनसे जमीन फिर से वापस लेना संभव नहीं है। साथ ही पंजाब सरकार ने इस मामले में केंद्र सरकार केरवैये पर भी आपत्ति जताई है। इसकेअलावा सरकार ने कहा है कि केंद्र सरकार को वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में पंजाब सरकार ने कहा है कि 16 नवंबर, 2016 को पंजाब विधानसभा द्वारा इस संबंध में बनाए कानून के तहत भूमालिकों को जमीनें वापस कर दी गई थी। सरकार ने कहा कि अब इन जमीनों को भूमालिकों से वापस लेना संभव नहीं है।
राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस मामले में केंद्र सरकार का रवैया बेहद नकारात्मक रहा है। चूंकि यह मामला दो राज्यों के बीच का है लिहाजा केंद्र सरकार को मध्यस्थता करनी चाहिए थी। लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की। प्रंजातांत्रिक व्यवस्था केतहत केंद्र सरकार को इस मामले में मध्यस्थता करनी चाहिए और विवाद को निपटाने की कोशिश करनी चाहिए थी लेकिन केंद्र ने ऐसा नहीं किया। साथ ही यह केंद्र सरकार को जिम्मेदारी थी कि इस मामले में उसे जल न्यायाधिकरण का गठन करना चाहिए लेकिन केंद्र ने यह भी नहीं किया।