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पंजाब में आया नया बेअदबी-रोधी विधेयक: आजीवन कारावास से भारी जुर्माने तक का प्रस्ताव, इसके मायने क्या? जानें

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 16 Jul 2025 05:58 PM IST

सार

बेअदबी होती क्या है? आप सरकार की तरफ से लाए गए विधेयक में क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं? राज्य में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़ा कोई कानून पहले से है या नहीं? इस विधेयक को अभी क्यों पेश किया गया? यह मुद्दा पंजाब में चुनाव पर किस तरह असर डालता है? आइये जानते हैं...
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आप के भगवंत मान (ऊपर), कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी (बाएं) और शिअद के सुखबीर बादल (दाएं)। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब सरकार पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अपराध रोकथाम विधेयक, 2025 के नाम का विधेयक लेकर आई है। बेअदबी से जुड़े इस विधेयक को सोमवार को मंत्रिमंडल से मंजूरी मिली। मंगलवार को इसे विधानसभा में पेश किया गया। सदन में हुई चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया। यह समिति छह महीने में अपनी रिपोर्ट विधानसभा को सौंपेगी। 

बेअदबी होती क्या है? आप सरकार की तरफ से लाए गए विधेयक में क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं? राज्य में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़ा कोई कानून पहले से है या नहीं? इस विधेयक को अभी क्यों पेश किया गया? यह मुद्दा पंजाब में चुनाव पर किस तरह असर डालता है? आइये जानते हैं...
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आप के भगवंत मान (ऊपर), कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी (बाएं) और शिअद के सुखबीर बादल (दाएं)। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब सरकार पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अपराध रोकथाम विधेयक, 2025 के नाम का विधेयक लेकर आई है। बेअदबी से जुड़े इस विधेयक को सोमवार को मंत्रिमंडल से मंजूरी मिली। मंगलवार को इसे विधानसभा में पेश किया गया। सदन में हुई चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया। यह समिति छह महीने में अपनी रिपोर्ट विधानसभा को सौंपेगी। 

बेअदबी होती क्या है? आप सरकार की तरफ से लाए गए विधेयक में क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं? राज्य में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़ा कोई कानून पहले से है या नहीं? इस विधेयक को अभी क्यों पेश किया गया? यह मुद्दा पंजाब में चुनाव पर किस तरह असर डालता है? आइये जानते हैं...

पहले जानें- बेअदबी होती क्या है?
बेअदबी का सीधा शाब्दिक अर्थ है- किसी भी धार्मिक महत्व की चीज के साथ अदब से पेश न आना। यानी वह धार्मिक वस्तु जिस सम्मान की हकदार है, वह उसे न मिलना। हालांकि, पंजाब में बेअदबी सिर्फ इतने तक ही सीमित नहीं है। इसमें किसी धार्मिक स्थल, कलाकृति या प्रतीक को अपवित्र करना या ऐसा व्यवहार करना शामिल हो सकता है जिसे किसी विशेष धार्मिक समूह के लिए अपमानजनक माना जाता है। धार्मिक चीजों के अपमान का मुद्दा पंजाब में काफी संवेदनशील माना जाता है। इसके चलते सरकारें अलग-अलग समय पर कानूनों को और सख्त बनाती रही हैं। 

नए बेअदबी-रोधी विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
विधेयक में बेअदबी रोकने से जुड़े पिछले कानूनों के मुकाबले और सख्त प्रावधान किए गए हैं। सबसे पहले तो इस विधेयक में सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को अपराध मानने का प्रावधान है। इसके तहत सिखों के पवित्र ग्रंथ- गुरु ग्रंथ साहिब, हिंदुओं की भगवत गीता, ईसाइयों की बाइबल और मुस्लिमों की कुरान शरीफ की बेअदबी को बराबर तौर पर अपराध माना जाएगा। यानी अगर कोई व्यक्ति इन ग्रंथों को नुकसान पहुंचाता है या इनका स्वरूप बिगाड़ने की कोशिश करता है, इन्हें जलाता है या फाड़ता है, आदि स्थिति में अपराधी को सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।



 

अगर बेअदबी के मामलों से सांप्रदायिक हिंसा, दंगे, मौतें या लोगों के घायल होने जैसी घटनाएं होती हैं तो दोषी को 20 साल तक की सजा हो सकती है, वहीं जुर्माने को बढ़ाकर 20 लाख तक किया जा सकता है। इसके अलावा दोषी कैद में रखे जाने के दौरान पैरोल का हकदार भी नहीं होगा। बेअदबी के लिए उकसाने वालों को भी सजा का प्रावधान रखा गया है। अगर कोई नाबालिग या दिव्यांग बेअदबी से जुड़े अपराध में शामिल पाया जाता है तो उसके अभिभावकों पर भी अभियोजन चलाया जाएगा। हालांकि, इन मामलों में स्थिति को भी देखा जाना तय किया गया है।

क्या भारत में नहीं हैं बेअदबी पर रोक से जुड़े कानून?
1860 में अंग्रेज शासकों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में एक प्रावधान जोड़ा था, जिसके तहत पवित्र स्थलों, समाधि स्थलों की बेअदबी को अपराध बना दिया गया था। इसके बाद अंग्रेजों ने आईपीसी में धारा 153ए जोड़ी, जिसके जरिए बेअदबी या ईशनिंदा के ऐसे मामले जिनसे सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है, उनमें दोषियों को सजा का प्रावधान किया गया। 

आईपीसी में ईशनिंदा को पूरी तरह अपराध मानने का प्रावधान 1927 में ब्रिटिश सरकार की तरफ से लाया गया, जब पंजाब में इसे लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़का था। उस वक्त रंगीला रसूल नाम की एक पुस्तिका को लेकर मुस्लिम धर्म से जुड़े लोगों ने जबरदस्त बवाल किया। इस मामले में आरोपी को सजा तो नहीं हुई, लेकिन अंग्रेज सरकार ने एक जज के प्रस्ताव के आधार पर आईपीसी में धारा 295 में बदलाव किया और धारा 295ए जोड़कर ईशनिंदा को अपराध बना दिया। इस तरह धार्मिक मसलों पर सख्त प्रावधान लाने में पंजाब शुरुआती केंद्र बना।

हालिया वर्षों में कब-कब बेअदबी के मुद्दों पर बवाल हुए?
पंजाब में बेअदबी का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। हालांकि, इससे जुड़े बड़े विवाद 2015 के बाद से शुरू हुए।

2015
  • 2015 में पंजाब के फरीदकोट जिले के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव में गुरु ग्रंथ साहिब के एक स्वरूप चोरी पर बवाल हुआ और प्रदर्शन भड़क गए।
  • 25 सितंबर 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव में ही सिखों और इस धर्म से जुड़े दो ग्रंथियों को लेकर भड़काऊ पोस्टर चिपके मिले। इन पोस्टरों में गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर धमकियां दी गई थीं। 
  • 12 अक्तूबर 2015 को गुरु ग्रंथ साहिब के कुछ पन्ने बरगारी गांव के गुरुद्वारे के सामने और एक पास की गली में बिखरे मिले थे। 

2018
अमृतसर के एक पार्क में गुरु ग्रंथ साहिब के पन्ने बिखरे मिले। इसी साल कुछ लोगों ने तरनतारन में एक गुरुद्वारे में तोड़फोड़ की थी और गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप को नुकसान पहुंचाया था। 

2019
बरगारी गांव में बेअदबी का एक कथित मामला सामने आया। पंजाब पुलिस ने इसे निजी विवाद का मुद्दा बताया और इसके पीछे धार्मिक या राजनीतिक इरादे से इनकार किया।

2021
18 दिसंबर 2021 को स्वर्ण मंदिर में एक युवक प्रार्थना स्थल की रेलिंग फांदकर उस जगह पहुंच गया जहां गुरु ग्रंथ साहिब रखी थी। आरोपी ने अंदर घुसकर महाराजा रणजीत सिंह की वो तलवार भी उठा ली, जो 19वीं सदी में गुरुद्वारे को दी गई थी। इस घटना में आरोपी को सेवादारों ने पकड़ लिया और उसकी कथित तौर पर पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। 

इसके अगले दिन कपूरथला के निजामपुर इलाके में एक व्यक्ति को कथित तौर पर गुरुद्वारे में निशान साहिब को नुकसान पहुंचाते पकड़ा गया था। इस व्यक्ति की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने बाद में कहा था कि वह शख्स बेअदबी के इरादे से नहीं, बल्कि चोरी के इरादे से घुसा था। 

2024
बेअदबी से जुड़ा सबसे ताजा मामला मई 2024 का है, जब फिरोजपुर के बंदाला गांव में एक 19 वर्षीय व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। युवक पर कथित तौर पर गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान का आरोप लगा था। हालांकि, पीड़ित के परिवार का कहना था कि वह मानसिक रोगी था और दो साल से दवाएं ले रहा था। बताया जाता है कि पंजाब में 2015 के बरगारी बेअदबी मामले के बाद से लेकर 2025 तक बेअदबी के आरोपों में 15 लोगों की हत्या हो चुकी हैं।     

पंजाब में बेअदबी से जुड़े कानूनों पर सरकारों ने क्या-क्या किया?


1. शिअद-भाजपा सरकार
2015 के बरगारी बेअदबी मामला जब हुआ, तब राज्य में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गठबंधन वाली सरकार थी। इस मुद्दे पर प्रदर्शनों के बाद पंजाब में धार्मिक बेअदबी से जुड़े नियमों- धारा 295 और धारा 295ए को सख्त करने की मांग उठी। 2016 में चुनाव से कुछ समय पहले ही सरकार ने आईपीसी (पंजाब संशोधन) कानून, 2016 पेश किया। इसके तहत गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस विधेयक को यह कह कर लौटा दिया कि देश का संविधान सभी धर्मों के बराबर होने की बात कहता है। इस धर्मनिरपेक्ष चरित्र की वजह से ही किसी एक धर्म के ग्रंथ की बेअदबी को लेकर आईपीसी की धाराओं में बदलाव नहीं किया जा सकता। केंद्र ने यह सलाह भी दी कि या तो यह संशोधन वापस लिया जाए या इसमें सभी धर्मों को शामिल किया जाए।

पंजाब सरकार ने विधेयक का यह कह कर बचाव किया कि गुरु ग्रंथ साहिब पवित्र ग्रंथ नहीं, बल्कि खुद एक जीवित गुरु हैं, जो कि इसे बाकी धर्मों के ग्रंथ से अलग करता है। हालांकि, केंद्र की सलाह के बाद पंजाब सरकार ने इस विधेयक को वापस ले लिया। 

2. कांग्रेस सरकार
शिअद-भाजपा सरकार के दौरान बेअदबी को मुद्दा बनाकर सत्ता में आई कांग्रेस ने 2015 के मामलों के आरोपियों को सजा दिलाने के साथ-साथ सख्त कानून बनाने की भी बात कही थी। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस दौरान न सिर्फ मामलों की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति का गठन किया, बल्कि विधानसभा में आईपीसी (पंजाब संशोधन) विधेयक, 2018 को सर्वसम्मति से पारित भी करवाया। इसके अलावा कांग्रेस सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता (पंजाब संशोधन), 2018 को भी पास करवा लिया। इसके तहत गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, कुरान और बाइबल को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से चोट-नुकसान पहुंचाने या इसकी बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया। 

पंजाब सरकार के इस विधेयक को लाने से पहले तक आईपीसी के तहत बेअदबी के दोषियों को अधिकतम तीन साल की सजा दी जा सकती थी। वह भी जुर्माना अनिवार्य नहीं था। हालांकि, अमरिंदर सिंह सरकार ने इस विधेयक के जरिए आईपीसी में धारा 295एए जोड़ने की कोशिश की, जिसके जरिए दोषियों की सजा को अधिकतम आजीवन कारावास तक किया जा सकता था। इसके अलावा आईपीसी की धारा 295 के तहत पहले जो बेअदबी से जुड़े मामलों में कम से कम 2 साल की सजा का प्रावधान था, तो अमरिंदर सरकार ने इसमें भी बदलाव कर कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान कर दिया। हालांकि, इस विधेयक को भी केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली और विधेयक अधर में लटका रहा। 

आम आदमी पार्टी सरकार अब क्यों लाई यह विधेयक?
इसके पीछे वजह गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ी घटनाओं का बढ़ना नहीं, बल्कि एक शख्स का आंदोलन है। इस व्यक्ति का नाम है- गुरजीत सिंह खालसा जो कि पंजाब के पटियाला में स्थित खेरी नगैयां गांव के रहने वाले हैं। गुरजीत समाना में बीते करीब 275 दिनों से 400 फीट ऊंचे एक बीएसएनएल टावर पर चढ़े हैं। 42 वर्षीय गुरजीत की मांग है कि सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों की बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून हो। उन्होंने कहा है कि वह तब तक टावर से नीचे नहीं उतरेंगे, जब तक सरकार ऐसा कानून बना नहीं देती। स्थानीय प्रशासन और सरकार तक की उन्हें टावर से नीचे उतारने की कोशिश बेकार हो चुकी है। 

गुरजीत के इस अनोखे आंदोलन ने पूरे पंजाब का ध्यान खींचा है। वह 12 अक्तूबर 2024 को टावर पर चढ़े थे। तब उन्होंने सिर्फ कंबल लपेटा था और एक पिस्तौल रखी थी। तब से लेकर अब तक वह नीचे नहीं आए हैं। न तो पुलिस और न ही अधिकारी उन तक पहुंच पाए हैं। खालसा ने धमकी दी है कि अगर कोई व्यक्ति टावर पर चढ़कर आता है तो वे पहले उसे गोली मार देंगे, फिर खुद को गोली मार लेंगे। 

कितना अहम है बेअदबी से जुड़ा मुद्दा?
2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मुद्दा 2017 के विधानसभा चुनावों में जोर-शोर से उठाया गया था। तब कांग्रेस ने इस मुद्दे को अपने चुनाव अभियान का आधार बना लिया था और अमरिंदर सिंह ने 2015 की घटना की गहन जांच कराकर इसके पीछे की पूरी साजिश का खुलासा करने का भी वादा किया था। नतीजा- चुनाव में शिअद-भाजपा गठबंधन को हार झेलनी पड़ी और कांग्रेस सत्ता में आई।

इसी तरह 2021 में स्वर्ण मंदिर में हुई बेअदबी की घटना ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले तूल पकड़ा। इसे लेकर कांग्रेस में ही दो फाड़ हो गए थे। तब पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने इसे मुद्दा बनाते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उनके मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। देखते ही देखते इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी ने उठा लिया और बेअदबी की घटनाओं को न रोक पाने के लिए कांग्रेस को घेरना शुरू किया। तब आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुद कहा था कि उनकी पार्टी बेअदबी मामलों में न्याय करके रहेगी।
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