ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में अब स्पाई कैमरा लेकर जाना संज्ञेय अपराध के दायरे में आएगा। ओडिशा सरकार ने इसे लेकर जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 में संशोधन करने की तैयारी की है। ओडिशा के कानून मंत्री ने कहा कि 12वीं सदी के मंदिर के अंदर स्पाई कैमरा ले जाने और तस्वीरें या वीडियो लेने के लिए सजा का प्रावधान किया जाएगा।
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने मंदिर में लोगों के बार-बार घुसकर विभिन्न तरीकों से छिपाकर कैमरे ले जाने की घटनाओं पर कहा कि ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए उचित कानून होना चाहिए। मंदिर के अंदर स्पाई कैमरे ले जाने वालों की पहचान करना बहुत मुश्किल है। पुलिस को स्पाई कैमरे के बारे में तभी पता चल सकता है जब तस्वीरें लेते समय टॉर्च हो। इसलिए एक कानून बनाना बेहद जरूरी है।
वहीं जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने मंदिर के अंदर जासूसी कैमरे लगाए जाने की घटनाओं पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। मंदिर प्रशासन ने कहा कि राज्य सरकार इसे रोकने के लिए एक कानून बनाए। एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा कि हमने विधि विभाग को चार प्रस्ताव दिए हैं। इसमें मंदिर के अंदर अनधिकृत फोटोग्राफी और जासूसी उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने पर दंड और जेल की सजा शामिल है।
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उन्होंने कहा कि हमने राज्य सरकार को श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 में संशोधन करने और मोबाइल फोन, वीडियो कैमरा, स्पाई कैमरे व अन्य सामान ले जाने को संज्ञेय अपराध बनाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि के लिए कारावास का प्रावधान करने और मंदिर के ऊपर ड्रोन उड़ाने को गैर-जमानती अपराध बनाने का सुझाव दिया है। सरकार हमारे प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेगी।
अब तक तीन लोग पकड़े गए
मंगलवार सुबह जगन्नाथ मंदिर में सुरक्षाकर्मियों ने पश्चिम बंगाल के प्रतीश पाल नामक एक व्यक्ति को मंदिर के अंदर मोबाइल फोन और जासूसी चश्मा ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किया। उसका मोबाइल और जासूसी चश्मा जब्त कर लिया गया। इससे पहले सोमवार को गुजरात के मूल निवासी बिपुल पटेल को स्पाई कैमरे लगे चश्मे के साथ मंदिर में प्रवेश करते हुए पकड़ा गया। वहीं एक सप्ताह पहले पुरी के अभिजीत कर नामक एक व्यक्ति को भी स्पाई कैमरे के साथ पकड़ा गया था।
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सुरक्षाकर्मियों को कड़ी नजर रखने के निर्देश: एसपी
पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीनों मामलों में पुलिस को कथित अपराधियों को रिहा करना पड़ा क्योंकि ऐसे लोगों को दंडित करने के लिए उचित कानून नहीं था। एसपी पिनाक मिश्रा ने कहा कि मंदिर के अंदर जासूसी कैमरा ले जाने वालों का पता लगाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी। ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जा रहा है। सुरक्षाकर्मियों को नजर रखने के लिए कहा गया है। विशेष कानून बनाने पर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के साथ चर्चा की जा रही है। एसपी ने कहा कि मोबाइल फोन, वीडियो कैमरा ले जाना तथा मंदिर के अंदरूनी हिस्से की तस्वीरें लेना सख्त मना है।