Swargate Bus Misdeed Case: महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्वारगेट बस दुष्कर्म मामले में आरोपी दत्तात्रय गाडे को स्थानीय अदालत ने 26 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आज आरोपी को 12 दिनों की रिमांड खत्म होने के बाद अदालत में पेश किया गया था।
महाराष्ट्र की एक अदालत ने बुधवार को स्वारगेट बस दुष्कर्म मामले के आरोपी को 26 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी दत्तात्रेय गाडे ने 25 फरवरी की सुबह स्वर्गेट टर्मिनस पर खड़ी राज्य परिवहन (एमएसआरटीसी) की बस के अंदर 26 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया था।
कैसे वारदात को दिया अंजाम?
25 फरवरी की सुबह, 26 वर्षीय पीड़िता स्वारगेट बस स्टैंड पर सातारा जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोपी ने खुद को बस कंडक्टर बताकर उसे एक बस तक चलने को कहा। इसके बाद पीड़िता जब बस में चढ़ी, तो वहां कोई नहीं था और बस के अंदर लाइट्स भी बंद थीं। इसके बाद मौके का फायदा उठाते हुए आरोपी दत्तात्रेय गाडे ने बस के दरवाजे बंद कर दिए और उसके साथ दुष्कर्म किया।
कैसे पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी?
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद ली और आरोपी को पुणे जिले के शिरूर तहसील के गुनाट गांव के खेतों से पकड़ा। पुलिस के अनुसार आरोपी दत्तात्रेय गाडे के खिलाफ पहले से ही आधा दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आज 12 दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान पुलिस ने दो दिन की और पुलिस कस्टडी का अधिकार सुरक्षित रखते हुए न्यायिक हिरासत की मांग की। इस पर कोर्ट ने आरोपी को 26 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस पूरे मामले में पुलिस गहराई से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
जेल में होगी आरोपियों की पहचान परेड- पुलिस
इस मामले में पुलिस ने बुधवार को बताया कि स्वारगेट बस दुष्कर्म मामले में आरोपी की पहचान परेड (टीआईपी) स्थानीय अदालत की तरफ से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जेल में की जाएगी। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया, 'चूंकि आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, इसलिए हम अदालत से जेल के अंदर आरोपी की पहचान परेड कराने का अनुरोध करेंगे।' टीआईपी आपराधिक जांच में एक प्रक्रिया है, जहां संदिग्ध को गवाहों या पीड़ितों के सामने पेश किया जाता है ताकि व्यक्तियों के एक समूह में से उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। अदालत की तरफ से जेल अधिकारियों और कार्यकारी मजिस्ट्रेट (तहसीलदार) को पत्र लिखे जाने के बाद, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और जेल अधिकारियों की मौजूदगी में जेल के अंदर टीआईपी आयोजित की जाएगी, जहां कोई भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'कार्यकारी मजिस्ट्रेट और जेल अधिकारी टीआईपी की रिपोर्ट तैयार करेंगे और इसे पुलिस को भेजेंगे।'