पुणे सड़क हादसा इन दिनों चर्चाओं में है। यहां एक तेज रफ्तार लग्जरी कार ने एक बाइक को टक्कर मार दिया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। कार 17 साल का नाबालिग चला रहा था, जो पूरी तरह नशे में धुत था। कोर्ट ने उसे निबंध लिखने की सजा देकर रिहा कर दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी और उसे अवलोकन गृह भेज दिया। पुलिस ने आरोपी के पिता सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया। नाबालिग आरोपी के दादा भी गुरुवार को पूछताछ के लिए पुणे पुलिस के अपराध शाखा कार्यालय पहुंचे।
मामले में महाराष्ट्र सरकार ने भी चिंता जाहिर की। वहीं, विपक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोला। विपक्ष ने आरोप लगाया कि स्थानीय एनसीपी विधायक सुनील टिंगरे ने इस मामले में पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। शिवसेना नेता ने सवाल किया कि एनसीपी के विधायक क्यों आधी रात को पुलिस स्टेशन गए थे। वहीं, मृतक के पिता ने हादसे के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। आखिर इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, सिलसिलेवार तरीके से जानिए…
पूरा मामला शुरू होता है रविवार से। रविवार तड़के 17 साल का आरोपी नशे में लग्जरी कार चला रहा था। इस दौरान उसने एक बाइक को टक्कर मार दी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई। दोनों पेशे से इंजीनियर थे। आसपास के लोगों ने आरोपी को पहले तो खूब पीटा फिर पुलिस को सौंप दिया। मृतकों की पहचान अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में हुई है। दोनों पार्टी करके घर जा रहे थे।
केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, बाद में रिहाई हुई
आरोपी के खिलाफ येरवडा पुलिस स्टेशन में 279 (रैश ड्राइविंग), 304 ए (लापरवाही से मौत), 337 (मानव जीवन को खतरे में डालना) और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपी को हिरासत में भी लिया गया। रविवार को ही उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया। कोर्ट ने उसे सड़क हादसे पर निबंध लिखने और 15 दिनों के लिए येरवडा यातायात पुलिस के साथ काम करने के लिए निर्देश दिया। इस दौरान पुलिस ने बार और आरोपी के पिता पर भी केस दर्ज कर लिया। हालांकि, पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने मीडिया को बताया था कि हमने अदालत से आरोपी के साथ वयस्क जैसा व्यवहार करने का आग्रह किया था। यह जघन्य अपराध है, हमने नाबालिग की हिरासत भी मांग की है। हम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट जाएंगे।
शराब पीता दिखा वेदांत, हजारों रुपये उड़ाए
इन सबके बीच आरोपी का एक वीडियो सामने आया, वीडियो में आरोपी दोस्तों के साथ शराब पीता हुआ दिख रहा था। पुलिस की मानें तो आरोपी नाबालिग ने हादसे से पहले कई पबों में पार्टी की थी। हादसे से पहले उसने दो पब में जाकर मात्र 90 मिनट में 48,000 रुपए खर्च कर दिए थे। पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बताया कि नाबालिग ने 48,000 रुपये का बिल कोजी में चुकाया गया। जो शनिवार रात 10 बजकर 40 मिनट पर किशोर और उसके साथियों द्वारा दौरा किया गया पहला पब था। कोजी रेस्त्रां द्वारा उन्हें सेवा देना बंद करने के बाद वे 12 बजकर 10 मिनट पर दूसरे पब ब्लैक मैरियट में चले गए। कुमार ने कहा, हमें पब का 48,000 रुपये का बिल मिला है, जिसका भुगतान नाबालिग के ड्राइवर ने किया था।
पुलिस ने पिता सहित चार को किया गिरफ्तार
कोर्ट ने मामूली शर्त पर किशोर को रिहा कर दिया। अदालत के इस फैसले की खूब आलोचना हुई। पुलिस ने आरोपी आरोपी के पिता, कोसी रेस्तरां के मालिक नमन प्रल्हाद भूतड़ा, इसके प्रबंधक सचिन काटकर और ब्लैक क्लब होटल के प्रबंधक संदीप सांगले को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया। पुणे की विशेष अदालत ने 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
एक्शन में आए सीएम-डिप्टी सीएम
पुणे पुलिस के प्रमुख ने मंगलवार को बताया था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 17 साल लड़के की कथित संलिप्तता वाले कार हादसे संबंधी मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं। फडणवीस ने कहा था कि पुणे में हुई घटना परेशान करने वाली है। मैंने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और अब तक क्या हुआ है और क्या कार्रवाई की जाएगी, इसका जायजा लिया।
राहुल गांधी बोले- ट्रक-बस चालक से निबंध क्यों नहीं लिखवाते
कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेट फार्म एक्स पर एक वीडिया शेयर कर फैसले पर सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। वीडियो शेयर कर राहुल गांधी ने कहा कि बस ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर, ओला-उबर और ऑटो अगर गलती से किसी को मार देते हैं तो 10 साल की सजा हो जाती है। चाबी उठाकर फेंक देते हैं। लेकिन, अगर अमीर घर का 16-17 साल का बेटा पोर्शे गाड़ी को शराब पीकर चलाता है और दो लोगों की हत्या कर देता है तो उससे कहा जाता है कि निबंध लिख दो। यह निबंध बस, ऑटो और उबर ड्राइवर से क्यों नहीं लिखवाते?
राजनीति भी शुरू हुई
मामले में विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाए। शिवसेना यूबीटी के नेता अंबादास दानवे ने बुधवार को पूछा कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घटना के बाद पुणे का दौरा क्या जांच एजेंसियों को बचाने के लिए किया था? दानवे ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर पुणे हादसे को लेकर हंगामा होने के बाद ही डिप्टी सीएम ने पुणे का दौरा किया। इस बीच, यह भी सामने आया कि स्थानीय एनसीपी विधायक सुनील टिंगरे ने इस मामले में पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। दानवे ने सवाल उठाया कि एनसीपी के विधायक क्यों आधी रात को पुलिस स्टेशन गए थे, जबकि मामले की जानकारी फोन पर भी ली जा सकती है।
मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार, पिता ने उठाए सवाल
मंगलवार को दोनों मृतकों का अंतिम संस्कार जबलपुर तथा बीरसिंहपुर पाली में किया गया। इस दौरान मृतकों के परिजनों ने व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा, बच्चे अपने उज्जवल भविष्य का सपना देख रहे थे। उनके सपनों के साथ ही हमारे भी सपने टूट गए। अश्वनी के पिता सुरेश कुमार कोष्टा ने बताया कि उनकी बेटी अपने उज्जवल भविष्य का सपना देख रही थी। उसके सपने के साथ मेरे सपने भी टूट गए। हर पिता की इच्छा होती है कि वह अपने बच्चों के नाम से पहचाना जाए। अब कौन कहेगा कि यह अश्वनी के पिता हैं। उन्होंने इस घटना के लिए सिस्टम पर परिवार की परवरिश को दोषी ठहराते हुए कहा कि नियम कानून का पालन किया जाता तो यह हादसा नहीं होता। इसके अलावा नाबालिग शराब के नशे में धुत होकर तेज रफ्तार में कार चला रहा था, परंतु उसे रोकने वाला कोई नहीं था। यातायात पुलिस अपने दायित्वों का पालन करती तो यह घटना नहीं होती।
उन्होंने कहा कि सरकार कानून बनाती है और उसका पालन की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। प्रशासन के अधिकारी तथा नाबालिग किशोर के माता-पिता अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन करते तो यह हादसा नहीं होता। इस हादसे के लिए नाबालिग लड़के के माता-पिता व प्रशासन जिम्मेदार हैं। जिन्होंने अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया।