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भीमा-कोरेगांव हिंसा: पुणे पुलिस का दावा- कश्मीरी अलगाववादियों से हैं पांचों आरोपियों के संबंध

Wed, 29 Aug 2018 09:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई 
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भीमा-कोरेगांव हिंसा और नक्सलवाद से संबंध के आरोप में गिरफ्तारी के बाद पुणे पुलिस ने दावा किया है कि आरोपियों के कश्मीरी अलगाववादियों से संबंध हैं। पुलिस का यह भी दावा है कि भीमा-कोरेगांव में यलगार परिषद के लिए प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की ओर से पैसे मुहैया कराए गए थे। यलगार परिषद में लोगों को भड़काने की पूर्वनियोजित योजना थी।

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पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त शिवाजीराव बोडके ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि 31 दिसंबर 2017 को भीमा-कोरेगांव में हुए एलगार परिषद के लिए कबीर कला मंच को पैसे मुहैया कराए गए। यह रकम प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के ईस्टर्न ब्यूरो की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। हथियारों का जमाव भी हुआ था। पुलिस को इसके पुख्ता सबूत मिले हैं। 

पूर्वनियोजित तरीके से जनता को भड़काया गया जिससे हिंसा हुई। पुलिस ने दावा किया कि पांचों आरोपियों के नक्सलियों से संबंध के ठोस सबूत मिले हैं। अब तक मिले ई मेल, पत्र आदि से यह जानकारी सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमले की साजिश रची गई थी। इसके अलावा देश में युवाओं को उकसा कर दंगा भड़काने की योजना थी। 
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आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के संबंध में संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि सभी नौ ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, हार्डडिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल, सिमकार्ड आदि सामग्री जब्त की गई है। पुणे पुलिस ने सभी पांच आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 153 ए, 505 (1) बी, 117 बी, 120 बी, 13,16,18,20, 38, 39, 40 और अवैध गतिविधि रोकथाम एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

8 करोड़ रुपये में खरीदे जाने थे हथियार

पुणे पुलिस की पत्रकार वार्ता से पहले कथित तौर पर नक्सलियों से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार अरुण परेरा, वरनान गोंसाल्विस और वरवरा राव को बुधवार को पुणे की सेशन कोर्ट में पेश किया। 

सरकारी वकील उज्वला पवार ने कोर्ट में दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तर्ज पर पीएम मोदी की साजिश रची गई थी और उन पर हमले के लिए आठ करोड़ रुपये में आधुनिक हथियार की खरीदी की जानी थी। नेपाल से हथियार खरीदी की जिम्मेदारी हैदराबाद से गिरफ्तार कवि वरवरा राव को दी गई थी। 

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