महाराष्ट्र कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने शुक्रवार को कहा कि पुणे जिले में 10 दिवसीय गणपति उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध पिछले 12 वर्षों में बढ़ती 'बहुसंख्यकवादी राजनीति' का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए कुछ भी करना लोकतंत्र के साथ-साथ देश की सामाजिक एकता के लिए भी खतरनाक है।
सावंत ने आरोप लगाया कि 2014 से केंद्र की सत्ता में रही भाजपा ने संघ परिवार से जुड़े संगठनों और अपने कार्यकर्ताओं के जरिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया और जमीनी स्तर पर दबाव बनाकर समाज में बहुसंख्यकवाद का माहौल तैयार किया।
कांग्रेस नेता क्यों बोले- यह नागरिकों और उनके अधिकारों को प्रभावित करने वाला फैसला?
कांग्रेस नेता ने कहा, 'सत्ता हासिल करने के लिए कुछ भी करना न केवल लोकतंत्र के लिए बल्कि देश की सामाजिक एकता के लिए भी खतरनाक है। सरकार को कोई फैसला लेते समय केवल बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं पर विचार नहीं करना चाहिए। उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे फैसले से अन्य नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता, जीवनशैली या अधिकार प्रभावित न हों।'
सावंत ने कहा कि यह केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने मीरा भयंदर के एक स्कूल में सामने आए हालिया मामले का भी जिक्र किया। इसमें कथित तौर पर जैन समुदाय के 'पर्युषण' पर्व को देखते हुए छात्रों से प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियों वाला खाना नहीं लाने को कहा गया था। सावंत ने इसे भी ऐसी ही मानसिकता का एक उदाहरण बताया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे प्रशासन को क्यों लगाई थी फटकार?
उन्होंने कहा, 'हर व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उन मान्यताओं को दूसरों पर थोपा नहीं जाना चाहिए।' इससे पहले शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान शराब पर प्रतिबंध लगाने को लेकर पुणे प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि जब मुंबई और अन्य क्षेत्रों में इस तरह की पाबंदी नहीं है तो केवल पुणे जिले को ही क्यों चुना गया।
मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने प्रशासन से प्रतिबंध वापस लेने को कहा। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं करने पर वह न्यायिक हस्तक्षेप करेगी। पीठ ने कहा कि एक जिले में इस तरह का मनमाना प्रतिबंध लगाकर प्रशासन पुणे और उसके निवासियों को कलंकित कर रहा है।
कहां से शुरू हुआ था विवाद?
अदालत होटल मालिकों और शराब की दुकानों के मालिकों के संगठनों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में पुणे कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव के दौरान 10 दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
पीठ ने पुणे कलेक्टर की ओर से पेश अधिवक्ता से दिन में बाद में यह बताने को कहा कि आदेश वापस लिया जाएगा या नहीं। अदालत ने कहा कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो वह उचित आदेश पारित करेगी। पीठ ने यह भी कहा कि वह समझती है कि अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और उपद्रव से बचने की जरूरत है, लेकिन लाइसेंसधारकों को 10 दिनों तक अपना कारोबार करने से रोकने वाला पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।