एक अधिकारी ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) ने शनिवार को नौ आरोपियों को चार साल और दो अन्य को तीन साल कैद की सजा सुनाई और उन पर जुर्माना लगाया। उन्होंने बताया कि आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और सूचना प्रौद्योगिकी कानून (आईटी एक्ट) के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया है। अगस्त 2018 में दो दिनों की अवधि में धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया था। इस संबंध में देश के विभिन्न हिस्सों से कम से कम 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
जानकारी के अनुसार, हैकर्स ने एक मैलवेयर के जरिए कॉसमॉस बैंक के वीजा और रुपे कार्ड ग्राहकों की जानकारी चुरा ली और स्विफ्ट सिस्टम पर हमला किया और 11 और 13 अगस्त, 2018 को 94 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की। हैकर्स ने बैंकों के एटीएम स्विच सर्वर पर हमला किया था और 28 देशों के विभिन्न एटीएम से 78 करोड़ रुपये निकाले थे और अन्य 2.5 करोड़ रुपये भारत के भीतर निकाले गए थे।
13 अगस्त को एक अन्य हमले में हैकर्स ने प्रॉक्सी स्विफ्ट सिस्टम का इस्तेमाल करके हांगकांग स्थित एक बैंक में धोखाधड़ी से 13.92 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए। पुलिस 13.92 करोड़ रुपये में से 5.72 करोड़ रुपये बरामद करने में सफल रही।
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