महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को राज्य संचालित ससून जनरल अस्पताल के दो डॉक्टरों को निलंबित कर दिया। उन्हें पुणे में पोर्श कार दुर्घटना में शामिल नाबालिग चालक के रक्त के नमूनों में कथित हेराफेरी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा बीजे मेडिकल कॉलेज और ससून सिविल अस्पताल के डीन डॉ. विनायक काले को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है। इसका अतिरिक्त प्रभार डॉ. चंद्रकांत म्हास्के को सौंप दिया गया है।
ससून अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. अजय टावरे और चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हलनोर को निलंबित करने का आदेश महाराष्ट्र चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त की सिफारिश पर दिया गया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि राज्य सरकार को आरोपों की जांच के लिए नियुक्त तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट मिल गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इन दोनों अधिकारियों (डॉक्टरों) को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। डॉ. चंद्रकांत म्हस्के पुणे जिले के बारामती स्थित पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी सरकारी मेडिकल कॉलेज के वर्तमान डीन हैं।
बता दें कि 19 मई की सुबह पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक कार ने एक मोटर साइकिल को टक्कर मार दी। आरोप है कि 17 वर्षीय किशोर तेज रफ्तार से कार चला रहा था। टक्कर से 20 वर्षीय दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कार चला रहा किशोर बिल्डर विशाल अग्रवाल का बेटा है, जो कि कार चलाते वक्त नशे में था।
किशोर उस वक्त नशे में था या नही इसके लिए उसके रक्त के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे गए। लेकिन सोमवार को पुलिस ने दावा किया कि पुणे के ससून जनरल अस्पताल में किशोर के रक्त के नमूनों को फेंककर और उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति के नमूने रखे गए थे। इन नमूनों में शराब का कोई निशान नहीं था। बता दें कि महाराष्ट्र चिकित्सा शिक्षा (एमएमई) विभाग ने सोमवार को मुंबई स्थित ग्रांट्स मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पल्लवी सापले की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था।