पुणे में फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने पर 11 पीजी हॉस्टल सील किए गए हैं। इन तीन और चार मंजिला इमारतों में 100 से ज्यादा छात्र रह रहे थे, लेकिन जरूरी अग्निशमन व्यवस्था और कई अहम दस्तावेज नहीं मिले। नगर निगम ने अनधिकृत पीजी संचालकों के साथ ऐसे हॉस्टलों में छात्रों को भेजने वाले शैक्षणिक संस्थानों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी है। गणेश उत्सव के बाद लोहगांव, खराड़ी और वाघोली में अभियान तेज किया जाएगा।
पुणे नगर निगम (पीएमसी) के फायर विभाग ने शुक्रवार को लोहगांव और निंबालकर नगर इलाके में 11 पेइंग गेस्ट (पीजी) हॉस्टल सील कर दिए। अधिकारियों के मुताबिक, इन हॉस्टलों में जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण और दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं थीं। इनमें कई तीन और चार मंजिला इमारतें थीं, जहां 100 से ज्यादा छात्र रह रहे थे। यह कार्रवाई दिल्ली और दूसरे शहरों में हुई हाल की घटनाओं के बाद पुणे में शुरू किए गए शहरव्यापी फायर सेफ्टी निरीक्षण का हिस्सा है।
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जांच में क्या-क्या कमियां मिलीं?
फायर ब्रिगेड की टीम को कई तीन और चार मंजिला इमारतों में 100 से ज्यादा छात्रों के रहने की जानकारी मिली, लेकिन वहां आग बुझाने की जरूरी व्यवस्था नहीं थी। अधिकारियों ने ऐसी इमारतों को छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से खतरे वाला बताया है।
पीजी संचालक जरूरी दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके। इनमें संपत्ति कर रिकॉर्ड, ड्रेनेज अनापत्ति प्रमाणपत्र, फायर एनओसी, स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट, पानी का एनओसी और भवन निर्माण की अनुमति से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
फायर सेफ्टी जांच क्यों शुरू की गई?
नगर आयुक्त नवल किशोर राम के निर्देश पर पुणे में व्यापक फायर सेफ्टी जांच शुरू की गई है। इसका दायरा सिर्फ पीजी हॉस्टलों तक सीमित नहीं है। पहले चरण में अस्पतालों, हॉस्टलों, स्टडी सेंटरों, कोचिंग क्लास और लाइब्रेरी की जांच की जा रही है। इसके बाद ऊंची इमारतों और निजी कंपनियों जैसे बड़े प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। फायर ब्रिगेड को इस पूरी कवायद की रिपोर्ट 10 दिन के भीतर सौंपनी है।
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किन नियमों का पालन जरूरी?
फायर सेफ्टी नियमों के मुताबिक प्रतिष्ठानों को अधिकृत एजेंसियों के जरिए समय-समय पर फायर ऑडिट कराना होता है। इसके अलावा नियमों के पालन का प्रमाण देने के लिए जनवरी और जुलाई में साल में दो बार बी फॉर्म जमा करना होता है।
नगर आयुक्त नवल किशोर राम ने अधिकारियों को अनधिकृत प्रतिष्ठान चलाने वालों और फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी गणेश सोनूने ने भी नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
क्या कॉलेजों पर भी कार्रवाई हो सकती है?
नगर निगम ने उन शैक्षणिक संस्थानों को भी चेतावनी दी है, जो छात्रों को अनधिकृत या असुरक्षित निजी हॉस्टलों में रहने के लिए भेजते या उनका सुझाव देते हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने पीजी में रहने वाले छात्रों से बातचीत की। कुछ छात्रों ने बताया कि उनके कॉलेजों ने ही उन्हें इन निजी हॉस्टलों के बारे में बताया था। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
पुणे में कितने पीजी और को-लिविंग सेंटर हैं?
अधिकारियों के अनुसार, पुणे में 25 से ज्यादा विश्वविद्यालय और बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं। शहर में करीब 3,500 पंजीकृत और अपंजीकृत पीजी हॉस्टल और को-लिविंग सुविधाएं होने का अनुमान है। नगर निगम का कहना है कि बहुमंजिला पीजी में जरूरत से ज्यादा छात्रों का रहना और पर्याप्त फायर सेफ्टी व्यवस्था नहीं होना आग लगने की स्थिति में छात्रों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
अब आगे कहां होगी कार्रवाई?
नगर निगम के अतिक्रमण रोधी विभाग के प्रमुख सोमनाथ बैंकर ने बताया कि गणेश उत्सव के बाद अवैध पीजी के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोहगांव, खराड़ी और वाघोली में कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इन इलाकों में बड़ी संख्या में कॉलेज हैं। नगर प्रशासन ने साफ किया है कि फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
फायर विभाग हॉस्टल, लाइब्रेरी, अस्पताल और दूसरे प्रतिष्ठानों की जांच करेगा। जहां भी फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं मिला, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बड़े प्रतिष्ठानों की जांच भी अगले चरण में होगी। इसमें ऊंची इमारतों और निजी कंपनियों को शामिल किया जाएगा, जबकि अवैध पीजी के खिलाफ कार्रवाई गणेश उत्सव के बाद और तेज की जाएगी।