जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की जल्द विदाई हो सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार पुलवामा हमले के बाद बने माहौल के शांत होने का इंतजार कर रही है। लोकसभा चुनाव से पहले कड़ा संदेश देने के लिए सरकार नए राज्यपाल के लिए सैन्य पृष्ठभूमि के कठोर प्रशासक की छवि वाले पूर्व अधिकारी की तलाश में जुटी है। छह अलगाववादियों की सरकारी सुरक्षा वापस लेने का फैसला भी इसी की एक कड़ी है।
एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक, पीडीपी-नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस की सरकार बनाने की कोशिशों के दौरान मलिक ने जिस तरह अपनी भूमिका निभाई, उससे सरकार खुश नहीं है। उस दौरान उनकी टिप्पणी से नाराज सरकार बड़ा फैसला लेने के मूड में थी लेकिन बाद में हालात में बदलाव आने तक इंतजार करने की रणनीति बनी। अब पुलवामा हमले के बाद नए सिरे से उनकी भूमिका पर चर्चा हुई है।
मंत्री के अनुसार, पुलवामा हमले के अगले दिन हुई कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की कमेटी की बैठक में भी मलिक को हटाने पर चर्चा हुई थी। इसके बाद नए राज्यपाल के लिए सैन्य पृष्ठभूमि के वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारी की तलाश शुरू हुई है। चूंकि इस हमले के कारण भाजपा के प्रभाव वाले जम्मू के साथ-साथ शेष भारत में भी बहुत गुस्सा और नाराजगी है। ऐसे में सरकार संदेश देना चाहती है कि उसने इस हमले को बहुत गंभीरता से लिया है।