पुलवामा हमले के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाबल (फाइल फोटो)
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पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान पर आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए वैश्विक दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद वह हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। वह इस आतंकी हमले की जांच कितनी गंभीरता से कर रहा है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पड़ोसी देश ने आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार द्वारा कबूलनामे वाली वीडियो में इस्तेमाल की गई बंदूक की जानकारी मांगी है।
पाकिस्तान की मांग है कि आतंकी की बंदूक का प्रकार, निर्माता और आईडेंटिफिकेशन नंबर (पहचान संख्या) बताए जाएं। इसके अलावा उसने 14 फरवरी को हुए हमले के बाद भारत में दर्ज एफआईआर की कॉपी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान मांगे हैं। भारत ने 27 फरवरी को पाकिस्तान को भेजे डॉजियर में इस हमले से जुड़े सबूत भेजे थे। जिसके जवाब में पड़ोसी देश ने यह मांग की है। भारतीय अधिकारी इन मांगों खासतौर से डार की बंदूक की जानकारी को मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
जिस हथियार का पाकिस्तान विवरण मांग रहा है उसका हमले में इस्तेमाल नहीं हुआ था और उसके आइडेंटिफिकेशन नंबर का पुलवामा घटना की जांच से कोई लेना-देना नहीं है। आत्मघाती हमले से पहले डार ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। जिसमें उसने कबूला था कि वह जैश का सदस्य है और उसे हमला करने की जिम्मेदारी मिली है। हमला विस्फोटक से भरी गाड़ी से किया गया था और उससे जुड़े सबूत पाकिस्तान को दिए जा चुके हैं। जिसमें हमले की जिम्मेदारी लेने वाले जैश का वाट्सऐप नंबर भी शामिल है।
भारत के डॉजियर के जवाब में पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को सरकार निराशा के तौर पर देख रही है। एक सूत्र ने कहा, 'जैश की संलग्नता को लेकर विशिष्ट और कार्रवाई योग्य इनपुट दिए गए थे लेकिन ऐसा नहीं लगता है कि पाकिस्तान ने उनपर गंभीरता से ध्यान दिया है।' हमले में जैश का हाथ होने के अलावा भारत ने उसे आतंकी कैंपों और उसके नेताओं के बारे में भी जानकारी दी है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत पर शुरुआती जांच विवरण जैसे कि एफआईआर और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान को साझा न करने का आरोप लगाया है।