पुलवामा में शहीद हुए जवानों का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ
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सीएपीएफ के जवानों के साथ सिर्फ शहादत के दर्जे में ही भेदभाव नहीं किया जाता बल्कि पेंशन, इलाज, कैंटीन जैसी जो सुविधाएं सेना के जवानों को मिलती है पैरामिलिट्री के जवान उसके हकदार नहीं माने जाते।
शहीद जवान के परिवार वालों को राज्य सरकार में नौकरी में कोटा, शिक्षण संस्थान में उनके बच्चों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं। वहीं पैरामिलिट्री के जवानों को ऐसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं।
सीएपीएफ जवानों को भी नहीं मिलती पेंशन
इतना ही नहीं पैरामिलिट्री के जवानों को पेंशन की सुविधा भी नहीं मिलती है। जब से सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बंद हुई है, तब से सीएपीएफ के जवानों की भी पेंशन भी बंद कर दी गई। सेना इसके दायरे में नहीं है।
कांग्रेस भी लंबे समय तक सत्ता में रह चुकी है और अब भाजपा की सरकार है। दोनों ही सरकारों ने सुरक्षा बलों के जवानों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें जरूर करते हों, लेकिन असल में देश के इन वीरों के बलिदान को उचित सम्मान देने के लिए दोनों ने ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया।