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पुलवामा हमला: 40 जवान 40 कहानियां, जानिए उन बहादुरों के बारे में जिन्होंने दिया सर्वोच्च बलिदान

Tue, 19 Feb 2019 06:20 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को आतंकियो द्वारा किए गए कायरतापूर्ण हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। इस हमले से पूरे देश में गम और गुस्से का माहौल है। अमर उजाला भारत के इन वीर सपूतों की शहादत को सलाम करता है। जानिए उन सभी शहीद जवानों के बारे में ये खास जानकारी-
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श्याम बाबू

श्याम बाबू

115 बटालियन
राइगवान, नोनारी, डेरापुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश
पुलवामा में हुए हमले की खबर श्याम बाबू के पिता को गुरुवार रात 10 बजे मिली। श्याम बाबू उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में स्थित राइगवान, नोनारी के रहने वाले थे। श्याम बाबू अपने पीछे पत्नी रूबी देवी, 5 साल के बेटे आयुष और 6 महीने की बेटी आयुषी को छोड़ गए हैं। 6 साल पहले वैवाहिक बंधन में बंधे श्याम बाबू को पहली पोस्टिंग साल 2005 में मिली।

अजीत कुमार आजाद

115 बटालियन
हाउस नंबर 133, 21, लोक नगर उन्नाव, सदर, उत्तर प्रदेश

अजीत कुमार आजाद उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले थे। बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद 69 वर्षीय रिटायर्ड आयकर अधिकारी प्यारेलाल ने कहा कि बेटे के जाने का दुख तो बहुत है लेकिन मेरे बेटे ने देश के लिए अपना जीवन दिया है। मुझे इस पर गर्व है। उन्होंने साल 2007 में अपनी पहली पोस्टिंग पाई थी।

अजीत पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। शहीद अजीत अपने पीछे पत्नी मीना और दो बेटियां 9 साल की ईशा औऱ 7 साल की श्रेया को छोड़ गए हैं। ईशा अपने पिता को याद कर भावुक हो गईं।
 

अमित कुमार

अमित कुमार
92 बटालियन
रायपुर, शामली, आदर्शमंडी, शामली, उत्तर प्रदेश

जब गुरुवार को अमित कुमार के बड़े भाई प्रमोद ने टीवी पर सीआरपीएफ के काफिले पर हमले की खबर सुनी तब उन्हें उन्हें यह नहीं पता था कि उनका छोटा भाई भी इसी बस में सवार था। एक निजी संस्थान में नौकरी करने वाले प्रमोद ने बताया कि उन्हें अब भी विश्वास नहीं है कि उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। उनके मौत की खबर सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा दी गई थी।

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रायपुर के रहने वाले अमित ने साल 2017 में सीआरपीफ को ज्वाइन किया था। वह अपने परिवार के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने किसी फोर्स को ज्वाइन किया था। अमित जनवरी के अंतिम सप्ताह में घर आए थे और 12 फरवरी को ड्यूटी ज्वाइन करने चले गए थे।
 

प्रदीप कुमार

प्रदीप कुमार
21 बटालियन
बनथ, शामली, उत्तर प्रदेश

सीआरपीएफ के 21वीं बटालियन में कांस्टेबल प्रदीप कुमार अपने पीछे पत्नी शर्मिष्ठा देवी, बेटा सिद्धार्थ और विजयंत को को पीछे छोड़कर गए हैं। सिद्धार्थ इंटरमीडिएट और विजयंत 10वीं के विद्यार्थी हैं। प्रदीप कुमार ने साल 2003 में सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था।

सिद्धार्थ ने बताया कि उनके पिता के शहीद होने की सूचना सीआरपीएफ के अधिकारियों के द्वारा दी गई थी। जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ के बस पर हमले की सूचना मिलने के बाद से ही परिवार ने जम्मू-कश्मीर कई फोन कॉल किए। लेकिन, उन्हें उस समय कोई भी जानकारी नहीं दी गई। बेटे ने बताया कि मेरे पिता हमेशा युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए उत्साहित करते रहते थे। वह जनवरी 15 दिन की छुट्टी पर घर आए हुए थे।

प्रदीप सिंह

प्रदीप सिंह
115 बटालियन
अजान, सुखचैनपुर, तेरवा, कन्नौज, उत्तर प्रदेश


जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ के बस पर हुए आत्मघाती हमले में शहीद प्रदीप सिंह यूपी के कन्नौज जिले के अजान गांव के रहने वाले थे। शहीद प्रदीप ने बुधवार को अंतिम बार अपने परिवार से बात की थी। परिवार ने बताया कि इसके अगले ही दिन उनके मौत की खबर आ गई। प्रदीप सिंह अपने पीछे पत्नी नीरज देवी, 11 साल की बेटी सुप्रिया और 3 साल की बेटी सोना को पीछे छोड़कर गए हैं।

प्रदीप सिंह ने साल 2003 में सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था। लेकिन, कुछ कारण से उनका प्रमोशन नहीं हो सका था। बाद में उन्होंने घर बनाने के लिए कर्ज भी लिया था जिसका कुछ हिस्सा उन्होंने चुका भी दिया था। लेकिन, अब बचा हुआ हिस्सा उनकी पत्नी को चुकाना होगा।

विजय कुमार मौर्या

विजय कुमार मौर्या
92 बटालियन
छपिया जयदेव, भटनी, भटनी, देवरिया, उत्तर प्रदेश

शहीद विजय कुमार मौर्य सीआरपीएफ के 92वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। विजय यूपी के देवरिया जिले के छपिया जयदेव गांव के रहने वाले थे। सीआरपीएफ के बस पर हमले की खबर सुनने के बाद उनके परिवार वालों ने जम्मू-कश्मीर में कई कॉल किए लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। लेकिन शाम को उन्हें सीआऱपीएफ के अधिकारी द्वारा उनके शहीद होने की खबर दी गई।

विजय कुमार ने साल 2008 में सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था। वे 10 दिन की छुट्टी के बाद 9 फरवरी को ड्यूटी पर चले गए थे। विजय कुमार अपने पीछे पत्नी विजय लक्ष्मी और 2 साल की बेटी आराध्या को छोड़ गए हैं। 

पंकज कुमार त्रिपाठी

पंकज कुमार त्रिपाठी
53 बटालियन
हरपुर, बेल्हाया, लेजर महादेव, महाराजगंज, उत्तर प्रदेश

सीआरपीएफ के 53वीं बटालियन के कांस्टेबल पंकज कुमार त्रिपाठी भी जम्मू कश्मीर में हुए आत्मघाची हमले में शहीद हो गए थे। पंकज उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के हरपुर गांव के रहने वाले थे। हमले वाले दिन सुबह 10 बजे उन्होंने अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। जब शाम को इस हमले की खबर आई तो उन्होंने दोबारा कॉल करने की कोशिश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। 

बाद में सीआरपीएफ अधिकारियों के द्वारा उनके शहीद होने की सूचना दी गई। पंकज अपने पीछे पत्नी रोहिणी और 3 साल के बेटे प्रतीक को छोड़कर गए हैं। उनके पिता पेशे से किसान हैं।

रमेश यादव

रमेश यादव
61 बटालियन
तोफापुर, बरेन, सद्दर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

शहीद रमेश यादव सीआरपीएफ के 61वीं बटालियन में कांस्टेबल के पोस्ट पर कार्यरत थे। रमेश कुछ ही दिन पहले छुट्टियों पर घर आए हुए थे। वह मंगलवार को जम्मू-कश्मीर वापस लौटे थे। अपने परिवार में वह इकलौते कमाई करने वाले सदस्य थे। उनके पिता किसान हैं। 

रमेश अपने पीछे पत्नी रेनू और 2 साल के बेटे आयुष को छोड़कर गए हैं। परिवार ने बताया कि उन्हें रात को 9 बजे सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा रमेश के शहीद होने की सूचना दी गई।
 

महेश कुमार

महेश कुमार
118 बटालियन
तुदीहर बादल का पुरवा, नेवड़ियां, मेजा, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश

शहीद महेश कुमार कुछ ही दिन पहले एक सप्ताह की छुट्टी पर घर आए हुए थे। जिसके बाद उन्होंने सोमवार को दोबारा ड्यूटी ज्वाइन की। उनके पिता मुंबई में ऑठोरिक्शा ड्राइवर हैं। महेश के छोटे भाई और बहन अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही उनसे बात की थी। जब उन्होंने अपनी पत्नी संजू देवी से बात की थी।

महेश और संजू की शादी साल 2011 में हुई थी। उनके दो बच्चे हैं 6 साल का समर और 5 साल की समीर।

अवधेश कुमार यादव

अवधेश कुमार यादव
45 बटालियन
बहादुरपुर, जलीलपुर, मुगलसराय, चंदौली

शहीद अवधेश कुमार यादव सीआरपीएफ के 45वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। उनकी मृत्यु गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में हुए आत्मघाती हमले में हो गई। अवधेश कुमार यादव ने हमले के दिन सुबह अपनी पत्नी शिल्पी से फोन पर बस में सफर करने की बात बताई थी। लोकिन शाम को उनके शहीद होने की खबर घर आई।

शहीद अवधेश अपने पीछे पत्नी शिल्पी और 2 साल के बेटे को छोड़ गए हैं।

राम वकील

राम वकील
176 बटालियन
विनायकपुर, लखनमऊ, मैनपुरी, उत्तर प्रदेश

शहीद रामवकील सीआरपीएफ के 176वी बटालियन में हेड कांस्टेबल के रूप में कार्यरत थे। राम वकील ने फरवरी में छुट्टी के बाद नौकरी को फिर से ज्वाइन किया था। कुछ ही दिन पहले उनकी पत्नी से बात हुई थी।

रामवकील अपने पीछे पत्नी गीता देवी, बेटे राहुल, अंर्पित और अंश को छोड़कर गए हैं। शहीद रामवकील के चचेरे भाई यूपी पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। राम वकील के पिता शरमनलाल की मौत 5 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में हो गई थी।

कौशल कुमार रावत

कौशल कुमार रावत
115 बटालियन
केहराई, आगरा, ताजगंज, प्रताप पुरा, उत्तर प्रदेश


शहीद कौशल कुमार रावत उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के केहराई गांव के रहने वाले थे। परिवार ने बताया कि उनसे हमले के एक दिन पहले फोन पर बात हुई थी जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी पोस्टिंग किसी दूसरे जगह हो गई है। जिसे उन्हें कल ज्वाइन करना है। इससे पहले कौशल कुमार सिलीगुड़ी में पोस्टेड थे।

कौशल पिछले साल अक्टूबर में 10 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। वह अपने पीछे पत्नी ममता रावत, पुत्री अपूर्वा, पुत्र अभिनव और विकास को छोड़कर गए हैं।
 

वसंता कुमार वीवी

वसंता कुमार वीवी
82 बटालियन
कुन्नाथीडावाका लक्कीडी, वायथिरी, वायनाड, केरल

वसंता कुमार वीवी सीआरपीएफ के 82वीं बटालियन में कार्यरत थे। वह केरल के वायनाड स्थित कुन्नाथीडावाका लक्कीडी के रहने वाले थे। गुरुवार को बस में बैठने से पहले वसंता ने अपनी मां को फोन कर कहा था कि वह नई बटालियन को ज्वाइन करने के लिए जाने वाले हैं। उन्होंने मां से यह वादा किया था कि श्रीनगर पहुंचकर दोबारा फोन करेंगे।

हमले की खबर सुनकर शहीद की पत्नी शीना ने कई बार उन्हें फोन करने की कोशिश की लेकिन कॉल नहीं लगा। लेकिन अगले दिन आधिकारिक रूप से उनके मौत की पुष्टि की गई। उन्होंने साल 2001 में सीआरपीएफ ज्वाइन किया था। उन्होंने 2 साल बाद रिटार्यमेंट का भी प्लान किया था लेकिन शायद नियति को कुछ और मंजूर था।

रोहितास लांबा

रोहितास लांबा
76 बटालियन
गोविंदपुरा वाया खजरौली, शाहपुरा, जयपुर, राजस्थान

शहीद रोहितास लांबा सीआरपीएफ के 76वीं बटालियन में कांस्टेबल के पोस्ट पर कार्यरत थे। वह राजस्थान के जयपुर जिले के गोविंदपुरा के रहने वाले थे। शहीद रोहितास पिछले साल 10 दिसंबर को पिता बने थे। लेकिन वह उस समय घर नहीं आ सके थे। वह जनवरी में अपने बेटे को देखने के लिए घर पहुंचे थे। पिता ने बताया कि बच्चा अभी 2 महीने का बहे लेकिन वह कभी भी अब अपने पिता का चेहरा अब नहीं देख पाएगा।

परिवार वालों ने बताया कि हमले की खबर सुनकर उन्होंने कई बार रोहिताश से संपर्क करने की कोशिश की थी लेकिन देर रात उनके शहीद होने की खबर मिली। रोहिताश अपने पीछे पत्नी और 2 महीने के बेटे को छड़कर गए हैं।
 

नारायण लाल गुर्जर

नारायण लाल गुर्जर
118 बटालियन
बिनोल, राजसमंद, राजस्थान 

सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल नारायण लाल गुर्जर राजस्थान के राजसमंद जिले के बिनोल के रहने वाले थे। वह इसी महीने छुट्टी से वापस ड्यूटी पर गए थे। उनके परिवार के सदस्य इस हमले को लेकर बदला लेने की मांग कर रहे हैं।

शहीद नारायण अपने पीछे पत्नी मोहिनी, पुत्री हेमलता और पुत्र मुकेश को छोड़कर गए है।
 

हेमराज मीणा

हेमराज मीणा
61 बटालियन
विनोद कलां, विनोद खुर्द, कोटा, राजस्थान

हेमराज मीणा राजस्थान के कोटा स्थित बिनोद कलां के रहने वाले थे। शहीद हेमराज अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों को छोड़कर गए हैं। बेटी को गुरुवार शाम को फोन आया कि उनके पिता जम्मू कश्मीर में हुए हमले में शहीद हो गए हैं। 

परिवार ने कहा कि इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
 

जीत राम

जीत राम
92 बटालियन
सुंदरवली, भरतपुर, राजस्थान


पुलवामा हमले में शहीद जीतराम राजस्थान के भरतपुर जिले के सुंदरवली के रहने वाले थे। वह सीआरपीएफ के 92वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। परिवार ने बताया कि हम हमले की खबर देख रहे थे तो टीवी में जीतराम का नाम भी आया लेकिन, हमें विश्वास नहीं हुआ। बाद में आधी रात को अधिकारियों के द्वारा फोन पर उनके शहीद होने की जानकारी दी गई।
शहीद जीतराम अपने पीछे पत्नी सुंदरी और दो बच्चों को छोड़कर गए हैं।
 

भागीरथ सिंह

भागीरथ सिंह
45 बटालियन
जैतपुर, देहोली, राजाखेड़ा, धौलपुर, राजस्थान

शहीद भागीरथ सिंह सीआरपीएफ के 45वीं बटालियन में कांस्टेबल के पोस्ट पर कार्यरत थे। उन्होंने 6 साल पहले सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था। शहीद के भाई यूपी पुलिस में कार्यरत हैं। 

शहीद भागीरथ सिंह अपने पीछे पत्नी रंजना, 3 साल का बेटा और 1 साल की बेटी को छोड़कर गए हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि वह अभी कुछ दिन पहले ही छुट्टियों पर घर आए थे और इसी सप्ताह ड्यूटी ज्वाइन किया था।

कुलविंदर सिंह

कुलविंदर सिंह
92 बटालियन
रौली, आनंदपुर साहिब, पंजाब

शहीद कुलविंदर इसी रविवार को घर से 10 दिन की छुट्टी से वापस ड्यूटी पर लौटे थे। वह अपने परिवार में एक शादी समारोह में शरीक होने के लिए घर आए हुए थे। जबकि उनकी खुद की शादी इसी साल नवंबर में होनी थी। 

शहीद कुलविंदर ने हमले के दिन सुबह ही घर बात की थी और घर के मरम्मत को लेकर बातचीत की थी। लेकिन, जब परिवार वालों ने शाम को उन्हें फोन किया तो कॉल कनेक्ट नहीं हुआ। कुलविंदर के पिता ट्रक ड्राइवर हैं। 
 

जयमाल सिंह

जयमाल सिंह
76 बटालियन
धर्मकोटा, मोगा, पंजाब

शहीद जयमाल सिंह सीआरपीएफ के 76वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल के पोस्ट पर कार्यरत थे। उनकी हमले के दिन सुबह में ही पत्नी से फोन पर बात हुई थी। वह हमले की चपेट में आई बस के ड्राइवर थे। उनकी पत्नी सुखजीत ने कहा कि वह श्रीनगर पहुंचकर दोबारा फोन करने वाले थे। जयमाल सिंह के पिता ने कहा कि मेरा बेटा तब गया जब उसकी सबसे ज्यागा जरुरत थी।

सुखजिंदर सिंह

सुखजिंदर सिंह
76 बटालियन
गंगीविंड, पट्टी, तरनतारन, पंजाब

सुखजिंदर सिंह को सात महीने पहले ही प्रमोशन मिला था। तरक्की मिलने के बाद घर में बेटे गुरजोत सिंह ने जन्म लिया था। पति को खोने वाली सरबजीत कौर ने पति के शहादत पर गर्व जताया। गांव में गदरी बाबा संता सिंह की यादगार बताती है कि यह गांव शहीदों का है। गांव की आबादी करीब 1300 है। इसमें से 40 युवा सेना और सीआरपीएफ में तैनात हैं। करीब 150 पूर्व सैनिक हैं। गांव के सरपंच अमरजीत सिंह कहते हैं कि गदरी बाबा संता सिंह की तरह सुखजिंदर सिंह का नाम भी आने वाली पीढ़ी याद रखेगी।

मनिंदर सिंह अत्री

मनिंदर सिंह अत्री
75 बटालियन
आर्य नगर, दीनानगर, गुरदासपुर, पंजाब
पंजाब के गुरदासपुर जिले के दीनानगर के रहने वाले मनिंदर सिंह अत्री भी उस हमले में मात्र 27 साल की उम्र में शहीद हो गए। उनके छोटे भाई भी अर्धसैनिक बल में पोस्टेड हैं। पिता सतपाल अत्री रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं। शहीद के एक मित्र ने बताया कि मनिंदर स्पोर्ट्स में बहुत रूचि रखते थे। इसके अलावा वह शादी का भी प्लान कर रहे थे।

मोहन लाल

मोहन लाल
110 बटालियन
बनकोट, दिहली, उत्तरकाशी, उत्तराखंड

शहीद मोहन लाल सीआरपीएफ के 110 बटालियन में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के बनकोट के रहने वाले थे। साल भर पहले ही मोहन लाल ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए फैमिली को देहरादून शिफ्ट किया था। उन्होंने साल 1988 में सीआरपीएफ ज्वाइन किया था। 

वीरेंद्र सिंह

वीरेंद्र सिंह
45 बटालियन
मोहम्मदपुर भूरिया, प्रतापपुर नंबर-4, खटिउमा, उधमसिंह नगर, उत्तराखंड

पुलवामा हमले में शहीद वीरेन्द्र सिंह सीआरपीएफ के 45 बटालियन में तैनात थे। वह उत्तराखंड के उधमसिंहनगर जिले के मोहम्मदपुर भूरिया गांव के रहने वाले थे। उन्होंने 20 दिन के अवकाश के बाद हमले के दो दिन पहले ही ड्यूटी ज्वॉइन की थी।
वीरेन्द्र सिंह के बड़े भाई जयराम सिंह बीएसएफ से रिटायर हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपने भाई पर गर्व है। उसने देश के लिए अपनी जान दे दी। वीरेन्द्र अपने पीछे पत्नी रेणू, 5साल की बेटी रूही और दो साल के बेटे व्यान को छोड़कर गए हैं।

संजय राजपूत

संजय राजपूत
115 बटालियन
लखानी प्लॉट, 21, बुलढ़ाना रोड, मल्कापुर,  बुलढ़ाना महाराष्ट्र

सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल शहीद संजय राजपूत 115 वीं बटालियन में तैनात थे। संजय ने साल 1996 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। हमले के दिन दोपहर में उन्होंने अपने एक रिश्तेदार से फोन पर बात की थी। संजय अपने पीछे पत्नी सुषमा, 13 साल के बेटे जय और 11 साल के बेटे शुभम को छोड़कर गए हैं।

संजय के भाई राजेश ने कहा कि भाई का शहीद होना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। सरकार को कश्मीर मामले का दीर्घकालिक हल खोजना चाहिए।

नितिन शिवाजी राठौड़

नितिन शिवाजी राठौड़ 
03 बटालियन
चोरपंगड़ा, बीबी, लोनर, बुलढ़ाना, महाराष्ट्र

शहीद नितिन शिवाजी राठौर महाराष्ट्र के रहने वाले थे। वह सीआरपीएफ के 03 बटालियन में कांस्टेबल पद पर कार्यरत थे। नितिन ने हमले के कुछ देर पहले ही अपनी पत्नी से बात की थी। किसी को यह नहीं पता था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। नितिन के जीवन और जीविषा नाम के दो बच्चों हैं। 

नितिन के भाई ने कहा कि मैं नहीं जानता कि उनकी पत्नी, बेटों और मां-पापा से कैसे इस बारे में बात करुंगा। मैं चाहता हूं कि हमारी तरफ से भी उन्हें कड़ा जवाब दिया जाए।

सुब्रमण्यम जी

सुब्रमण्यम जी
82 बटालियन
सबलपेरी, विल्लीसेरी, कोविलपट्टी

शहीद कांस्टेबल सुब्रमण्यम जी सीआरपीएफ के 82 बटालियन में कार्यरत थे। वह तमिलनाडु के तूतीकोरिन के रहने वाले थे। सुब्रमण्यम एक महीने की लंबी छुट्टी के बाद रविवार को ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। वह अपने पिता का इलाज कराने के लिए घर आए हुए थे। 
उन्होंने हमले के दिन दोपहर में कॉल कर घर अपनी पत्नी से बात की थी। पिता ने बताया कि सुब्रमण्यम ने बुधवार को उनसे फोन पर बात कर दवा समय पर खाने और धूल से दूर रहने के बारे में बोला था। 

सी शिवचंद्रन

शहीद सी शिवचंद्रन ने हमले के दो घंटे पहले ही अपनी गर्भवती पत्नी से बात की थी। लेकिन, किसे पता था कि यह उनके बीच की आखिरी बातचीत होगी। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि उनकी पत्नी कोई जॉब नहीं करती और पिताजी एक फार्म में काम करते हैं। वह 7 जनवरी को एक महीने के छुट्टी पर घर भी आए थे। 

शिवचंंद्रन ने साल 2010 में सीआरपीएफ ज्वाइन किया था। वह अपने पीछे पत्नी और 2 साल के बेटे को छोड़कर गए हैं।

विजय सोरेंग

विजय सोरेंग
82 बटालियन
फरसामा, बनागुटू, बसिया, गुमला, झारखंड
 
शहीद विजय सोरेंग झारखंड के गुमला जिले के फरसामा के रहने वाले थे। विजय एक सप्ताह पहले ही घर आए हुए थे। उनके पिता भी फोर्स में है जबकि उनकी पत्नी भी झारखंड आर्म्ड पुलिस में हैं। 

उनके भाई ने कहा कि हमें अपने भाई की शहादत पर गर्व है। उन्होंने देश की सेवा करते हुए शहादत दी थी। 

सुदीप बिस्वास

सुदीप बिस्वास

शहीद सुदीप बिस्वास अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनके पिता सन्यासी बिस्वास फार्म में कर्मचारी हैं। सुदीप ने साल 2014 में सीआरपीएफ ज्वाइन किया था। इस साल के अंत में उनके शादी की भी तैयारी थी। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

बबलू संतारा

बबलू संतारा
35 बटालियन
पश्चिम बौरिया, चकाशी, हावड़ा, पश्चिम बंगाल

सीआरपीएफ में हेडकांस्टेबल के पद पर कार्यरत बबलू संतारा भी गुरुवार को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में शहीद हो गए थे। उन्होंने अगले महीने 3 मार्च को घर जाने का प्लान भी बनाया था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

वह इसके लिए टिकट की बुकिंग भी कर चुके थे। वह अपने नवनिर्मित घर की पेंटिंग के लिए गांव आने वाले थे। उन्होंने गुरुवार को सुबह 10 बजे अपने परिवार से भी बात की थी। वह अपने पीछे पत्नी और 6 साल की बेटी को छोड़कर गए हैं।

मनेश्वर सुमातारी

मनेश्वर सुमातारी
98 बटालियन
कलबाड़ी, तमुलपुर, बक्सा, असम

शहीद मनेश्वर एक महीने की छुट्टी बीताकर 4 फरवरी को दोबारा ड्यूटी पर लौटे थे। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि वह घर के नजदीक पोस्टिंग की कोशिश करेंगे। वह बोडो समुदाय के थे। मनेश्वर सीआरपीएफ के 98 बटालियन में पोस्टेड थे। उनके दो बच्चे हैं। जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल है।

पत्नी ने बताया कि हमले वाले दिन सुबह में उनसे बात हुई थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि वह जम्मू से श्रीनगर जा रहे हैं। 

पीके साहू

पीके साहू
61 बटालियन
शिखर, नौगान, जगतसिंह पुर, ओडिसा

शहीद प्रसन्ना कुमार साहू सीआरपीएफ के 61 बटालियन में कार्यरत थे। वह ओडिसा के जगतसिंह पुर के शिखर गांव के रहने वाले थे। साहू अपने पीछे पत्नी, एक बेटी और एक बेटे को छोड़ गए हैं। 

मनोज कुमार बेहरा

मनोज कुमार बेहरा
82 बटालियन
रतनपुर, मधबा, कटक, ओडिसा

दिसंबर में ही मनोज अपने घर आए थे। जहां उन्होंने अपनी बेटी का बर्थडे सेलिब्रेट किया था। इसके बाद वह 7 फरवरी को दोबारा ड्यूटी पर लौट गए थे। जम्मू कश्मीर में यह उनकी दूसरी पोस्टिंग थी। 
सीआरपीएफ के 82 बटालियन में पोस्टेड मनोज कुमार बेहरा अपने पीछे पत्नी और बेटी को छोड़ कर गए हैं। हमले के कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी से बात की थी।

रतन कुमार ठाकुर

रतन कुमार ठाकुर
45 बटालियन
रतनपुर, मदरगंज, अंदानदा, भागलपुर, बिहार

सीआरपीएफ के 45 बटालियन में तैनात रतन कुमार ठाकुर ने हमले के कुछ ही देर पहले अपनी पत्नी से बात की थी। उन्होंने बातचीत में कहा था कि वह शाम तक श्रीनगर पहुंच जाएंगे। शहीद रतन ने साल 2011 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। वह अपने पीछे पत्नी और 4 साल की बेटी को छोड़ गए हैं।

संजय कुमार सिन्हा

संजय कुमार सिन्हा
176 बटालियन
तरगना मठ, मशुरही, कशीदी, पटना, बिहार

शहीद संजय कुमार सिन्हा सीआरपीएफ के 176 बटालियन में पोस्टेड थे। वह बिहार के पटना जिले के रहने वाले थे। वह घर पर महीने भर की छुट्टी बीताकर 8 फरवरी को वापस ड्यूटी पर लौटे थे। उन्होंने जाते समय कहा था कि वह जल्द ही 15  दिन की छुट्टी पर वापस घर आएंगे लेकिन,एसा हो न सका।
वह अपनी छोटी बहन की शादी करना चाहते थे। उनकी बेटी ने भी हाल में ही ग्रेजुएशन पूरा किया था। जबकि बेटा मेडिकल की तैयारी के लिए कोटा में रहता था।

तिलकराज

तिलकराज
76 बटालियन
धीवा, धरकला, जवाली, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए कांगड़ा के ज्वाली के नाणा पंचायत के धेवा गांव के शहीद तिलक राज शहादत के बाद लोकगायकी के स्टार बन गए हैं। यू-ट्यूब पर तिलकराज शानू के नाम से मशहूर उनके गानों को खूब पसंद किया जा रहा है। वह सीआरपीएफ के 76 बटालियन में तैनात थे। 

तिलक राज की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला धेवा में हुई। स्कूल घर से डेढ किमी दूर था और वह हर रोज पैदल स्कूल पहुंचते। आगे की पढ़ाई के लिए वह छह किलोमीटर दूर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला परगोड़ा  से की।

शहीद तिलकराज के साथ जमा एक और जमा दो की पढ़ाई में साथ रहे धर्मशाला महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर अजय कुमार ने बताया कि वह स्कूल समय से ही लोकगायन का शौक रखते थे। वह स्कूल में आयोजित सांस्कृतिक और अन्य प्रतियोगिताओं में अक्सर भाग लेते और जीतते भी थे।
 

अश्वनी कुमार काओची

अश्वनी कुमार काओची
35 बटालियन
कुदावल, दर्शनी, सिहोरा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

सीआरपीएफ के 35 बटालियन में कार्यरत शहीद अश्वनी कुमार काओची मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे अश्वनी साल 2017 में सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था। परिवार ने बताया कि उनकी शादी के बारे में सोचा जा रहा था। अश्वनी के परिवार के पास डेढ़ एकड़ की भूमि है।

नसीर अहमद

नसीर अहमद
76 बटालियन
डोडासनबाला, राजौरी, जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के रहने वाले नसीर अहमद पुलवामा में हुए हमले में शहीद हो गए थे। वह 2014 में पुलावामा में आई भीषण बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य में शरीक हुए थे और ठीक 5 साल बाद उसी जगह पर शहीद भी हो गए।

वह अपने पीछे पत्नी शाजिया कौसर और दो बच्चों को छोड़कर गए हैं। नसीर अपने 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। 
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गुरू एच

 गुरू एच
82 बटालियन
गुडीगिरी, बिधरहल्ली, के एम डोड्डी, मंड्या, कर्नाटक

शहीद एच गुरू सीआरपीएफ के 82 बटालियन में कार्यरत थे। कुछ समय घर पर रहने के बाद उन्होंने 10 फरवरी को ड्यूटी दोबारा ज्वाइन की थी। उन्होंने श्रीनगर जाते हुए अपने घर पर बात की थी। 
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