डॉक्टर ने मीडिया से बात करने से भी इनकार कर दिया। नाम उजागर ना करने की शर्त पर सोमवार को डॉक्टर ने बताया था कि उन्हें तंग किया गया लेकिन उन्होने शुरुआत में धमकियों पर कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन चिंता तब बढ़ गई जब कुछ लोगों ने उनके घर के बाहर इकट्ठे होकर उनके पाकिस्तान ना जाने पर उनकी बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।
उन्होंने बताया कि पुलवामा हमले के एक दिन बाद 15 फरवरी को उनके (डॉक्टर के) घर लौटने के बाद 20 से 25 वर्ष की आयु के पांच व्यक्ति उसके घर पहुंचे और उन्हें तुरंत शहर छोड़ने की धमकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान वापस जाओ क्योंकि कश्मीरियों के लिए इस देश में कोई जगह नहीं है।
डॉक्टर ने कहा कि इस बार धमकी गंभीर लगी और उन्होंने शहर छोड़ने का मन बना लिया था लेकिन उन्होंने इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क करने का फैसला किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रवर्ती ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का आश्वासन दिया था।