सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर केंद्र सरकार को रियल्टी क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए बिल्डर व एजेंट बायर के बीच आदर्श समझौते की रुपरेखा तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय याचिका में सभी राज्यों को ‘मॉडल बिल्डर खरीदार एग्रीमेंट’ और ‘मॉडल एजेंट बायर एग्रीमेंट’ लागू करने की मांग की है ताकि खरीदार को मानसिक और वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके।
याचिका में कहा गया है कि प्रमोटर, बिल्डर और एजेंट मनमाने ढंग से एकतरफा समझौते का इस्तेमाल करते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 21 का उल्लंघन है। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें फ्लैट खरीदारों को समय पर कब्जा नहीं दिया गया।
खरीदार पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन समझौते की बाध्यता के कारण पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती। इस कारण खरीदार को न केवल मानसिक तौर पर बल्कि वित्तीय तौर पर भी काफी नुकसान पहुंचता है।