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SC: न्यायिक आदेशों के बावजूद यूपी के जन स्वास्थ्य रक्षकों को नहीं मिल रहा उनका हक, सुप्रीम कोर्ट का किया रुख

Sun, 23 Oct 2022 02:07 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1977 में भारत सरकार द्वारा जन स्वास्थ्य रक्षक योजना शुरू की गई थी। इस योजना के अन्तर्गत जन स्वास्थ्य रक्षको की नियुक्ति की गई, जिन्हें 50 रुपए प्रति माह मानदेय भुगतान किया जाता था। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
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विस्तार
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चार दशक से अधिक समय पहले भारत सरकार द्वारा शुरू की योजना के तहत नियुक्त हुए उत्तर प्रदेश के जन स्वास्थ्य रक्षकों ने अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन लोगों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण(कैट) और हाईकोर्ट से सकारात्मक राहत मिली है, बावजूद इसके वे अपने हक से वंचित हैं।

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एक नई उम्मीद लिए जन स्वास्थ्य रक्षकों ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए गुहार लगाई हैं कि सबंधित अथॉरिटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 2013 में दिए आदेश का पालन करने का निर्देश दिया जाए।

वकील पुष्कर शर्मा के माध्यम से छेदी लाल सहित अन्य जन स्वास्थ्य रक्षकों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1977 में भारत सरकार द्वारा जन स्वास्थ्य रक्षक योजना शुरू की गई थी। इस योजना के अन्तर्गत जन स्वास्थ्य रक्षको की नियुक्ति की गई, जिन्हें 50 रुपए प्रति माह मानदेय भुगतान किया जाता था। 
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याचिका में कहा गया है कि इस मानदेय की बढ़ोतरी के लिए इन लोगों ने कैट याचिका दायर की थी, जहां उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए मानदेय में बढ़ोतरी की मंजूरी भी दी गई लेकिन राज्य सरकार द्वारा आपेक्षित कार्यवाही नही की गई। जिसके बाद 1996 अखिल भारतीय जन स्वास्थ्य रक्षक समिति ने हाईकोर्ट का रुख किया। इस बीच वर्ष 2002 में केंद्र ने यह योजना वापस लिया गया और कहा गया कि जो राज्य इसे जारी रखना चाहते हैं वे जारी रख सकते हैं। यूपी सरकार ने इस योजना को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। ये जन स्वास्थ्य रक्षक 2002 तक काम करते रहें। 24 जुलाई, 2013 को हाईकोर्ट ने सरकार को इन सभी को वेतनमान 750-940 रुपए के अंतर्गत जन स्वास्थ्य रक्षकों को भुगतान करने का आदेश दिया।

याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सबंधित अथॉरिटी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी संदर्भ में एक अन्य वाद में हाईकोर्ट ने 23 नवंबर, 2017 को महानिदेशक, जन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण(उत्तर प्रदेश) को उक्त समस्या के निदान हेतु निर्देशित किया गया। इस बार भी समस्या का विधिवत निराकरण नही किया गया। थक हारकर अब जन स्वास्थ्य रक्षको ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

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