आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण
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सामान्य श्रेणी के गरीबों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान सोमवार से लागू हो गया। सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण देने के संबंध में सरकारी अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी गई। संविधान के 103 संशोधन अधिनियम, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को मंजूरी दी थी।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा(2) के तहत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिन्हित किया है, जिस दिन यह कानून प्रावधान प्रभाव में आया है।
इस अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का संशोधन किया गया है और एक उपबंध जोड़ा गया है जो राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार देता है। यह विशेष प्रावधान अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर अन्य निजी संस्थानों समेत शिक्षण संस्थानों में प्रवेश से जुड़ा है। इनमें सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान शामिल हैं।
संसद ने 9 जनवरी को दी थी विधेयक को मंजूरी
आर्थिक तौर पर पिछड़े सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने वाले इस विधेयक को नौ जनवरी को संसद में मंजूरी दी गई थी। इसमें कहा गया है कि इसे ध्यान में रखते हुए कि नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उच्च शिक्षा पाने तथा सरकारी सेवाओं में रोजगार में भागीदारी का उचित अवसर मिले, भारत के संविधान में संशोधन का फैसला किया गया है।
विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 46 में उल्लेखित राज्य के नीतिनिर्देशक सिद्धांतों के अनुसार सरकार नागरिकों के कमजोर वर्गों, खासकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों को विशेष सतर्कता के साथ प्रोत्साहित करेगी और उन्हें सामाजिक अन्याय तथा हर तरह के उत्पीड़न से बचाएगी।