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वांगचुक का सरकार को संदेश: प्रदर्शन रोकने के बजाय जनता की आवाज सुनिए; क्यों दी श्रीलंका-बांग्लादेश की मिसाल?

Sat, 24 Oct 2026 09:01 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।

सार

सोनम वांगचुक ने कहा कि विरोध प्रदर्शन सरकारों को अपनी कमियां समझने और बेहतर काम करने का मौका देते हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के संदर्भ में उन्होंने श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए चेताया कि जनता की आवाज दबाने से सरकारों को ही नुकसान हो सकता है। प्रदर्शनों को लेकर वांगचुक ने क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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सोनम वांगचुक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/इंस्टाग्राम
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विस्तार
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जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने शनिवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन सरकारों को बेहतर काम करने का मौका देने का एक अच्छा तरीका हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जाती है, तो श्रीलंका और बांग्लादेश में हुई अशांति जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। मुंबई में आयोजित आईपीएफ महोत्सव में वांगचुक ने ये बातें कहीं। 
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उन्होंने कहा कि दुनियाभर के देश खुशी-खुशी विरोध प्रदर्शनों की अनुमति देते हैं। ये प्रदर्शन संसद के ठीक सामने भी होते हैं। वांगचुक ने दावा किया, सभी देशों में संसद के सामने का स्थान विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र होता है। उन्होंने कहा, ब्रिटेन, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देशों में संसद के ठीक सामने प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाती है।

उन्होंने जोर देकर कहा, भारत में विरोध प्रदर्शन संसद से काफी दूर होते हैं। जब प्रदर्शन सिर्फ जंतर-मंतर पर होते थे, तब भी वह जगह बहुत दूर थी। उन्होंने कहा, विरोध प्रदर्शन सरकारों को बेहतर काम करने का मौका देने का एक अच्छा तरीका हैं। ये प्रतिक्रिया देने का माध्यम हैं। अगर सरकारें इनसे मिलने वाले संदेश को समझें, तो इससे उन्हें बेहतर काम करने में मदद मिल सकती है। 
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जंतर-मंतर में प्रदर्शन पर रोक क्यों?
वांगचुक की यह टिप्पणी केंद्र सरकार की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बीच अहम मानी जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। इसके बाद केंद्र ने सख्ती की थी।

विपक्ष ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। वांगचुक ने कहा, देखिए, जब विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जाती, तो क्या होता है। श्रीलंका और बांग्लादेश इसके उदाहरण हैं।

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प्रदर्शन की अनुमति क्यों लें?
उन्होंने कहा, विरोध प्रदर्शन करने के लिए अनुमति नहीं मांगी जानी चाहिए। वांगचुक ने कहा कि अनुमति लेने की व्यवस्था यह जांचने के लिए होनी चाहिए कि शहर में क्या हो रहा है। उदाहरण के लिए, त्योहारों के आयोजन के लिए ऐसी व्यवस्था हो सकती है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए वांगचुक ने कहा कि सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सही तरीका है। यह अधिकार संविधान ने नागरिकों को दिया है।

उन्होंने कहा, विरोध प्रदर्शन करने के लिए अनुमति नहीं मांगी जानी चाहिए। वांगचुक ने कहा कि अनुमति लेने की व्यवस्था यह जांचने के लिए होनी चाहिए कि शहर में क्या हो रहा है। उदाहरण के लिए, त्योहारों के आयोजन के लिए ऐसी व्यवस्था हो सकती है।

सरकार को क्या चेतावनी दी?
कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सहित प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा, संदेश देने वाले को मत मारिए। संदेश को समझिए। वांगचुक ने कहा, अगर आप ऐसे काम करेंगे, जिन्हें करने की जरूरत नहीं है, तो लोग आपके खिलाफ हो जाएंगे। इससे सरकार को ही नुकसान होगा। वही कीजिए, जो सही है। 

केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए वांगचुक ने कहा,  अर्धसैनिक बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं। लेकिन ये बल अपने ही लोगों के पीछे लगे हैं। मेरे जैसे लोगों और हमारे युवाओं के पीछे। 
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इस महीने की शुरुआत में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से प्रदर्शन का आह्वान किए जाने पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना हुई थी।

वांगचुक की यह टिप्पणी लद्दाख प्रशासन के उस फैसले के बाद भी आई है, जिसमें हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (एचआईएएल) को दी गई जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया था। प्रशासन ने कार्यकर्ता की ओर से 'कानून की अनदेखी' का हवाला देते हुए अपने फैसले का बचाव किया था। उसने कहा था कि बकाया राशि का भुगतान नहीं करने और पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने के कारण जमीन का आवंटन अपने आप समाप्त हो गया था।
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