Maharashtra: कल्याण डोंबिवली नगर निगम द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के आदेश के खिलाफ कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे सहित कई विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिंदा मुर्गियां लेकर नारेबाजी की और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
कल्याण डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मांस की दुकानों और बूचड़खानों को बंद रखने के आदेश का कई विपक्षी दलों, मांस विक्रेता संगठनों और सामुदायिक समूहों ने विरोध किया। उन्होंने कल्याण स्थित नगर निगम मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिंदा मुर्गा और चिकन हाथ में लेकर मांस पर प्रतिबंध के खिलाफ नारेबाजी की।
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विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता मौजूद थे। केडीएमसी ने आदेश दिया था कि 14 अगस्त की मध्यरात्रि से 15 अगस्त की मध्यरात्रित तक सभी बूचड़खानों और मांस की दुकानों को बंद रखा जाएगा और आदेश के उल्लंघन पर महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम, 1949 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
नगर आयुक्त अभिनव गोयल ने कहा कि यह फैसला सरकार के आदेश के अनुसार है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार सुबह से शिवाजी चौक और शंकरराव चौक के बीच भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और विरोध शुरू होने से पहले कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया।
विरोध प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस जिला अध्यक्ष सचिन पोते ने कहा, मुर्गी सुबह लोगों को जगाती है। आज हम प्रशासन को जगाने के लिए मुर्गियों को साथ लेकर आए हैं। महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, मालेगांव और छत्रपति संभाजीनगर नगर निगमों ने भी ऐसे ही आदेश दिए हैं। इससे निजी स्वतंत्रता के सवाल खड़े हुए हैं। विपक्षी दलों ने इस कदम की आलोचना की है, जबकि भाजपा की दलील है कि स्वतंत्रता दिवस पर बूचड़खानों को बंद रखने की नीति पहली बार 1988 में शुरू हुई थी। तब शरद पवार मुख्यमंत्री थे और विपक्ष ने पूछा कि क्या वे इस पर पवार से सवाल करेंगे?