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मराठा आंदोलन: भारत बंद के चलते पुणे में बस और इंटरनेट सेवाएं बाधित

Thu, 09 Aug 2018 12:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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Maratha Reservation
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मराठा आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मराठा मोर्चा ने गरुवार को एक बार फिर भारत बंद का आह्वान किया है। आंदोलन के नेताओं ने कहा कि यह बंद शांतिपूर्ण होगा। हालांकि इसके बाद भी कुछ इलाकों में रास्ता बंद करने की खबरें आई हैं। इस बार नवी मुंबई और ठाणे को इस बंद से अलग रखा गया है। दरअसल पिछली बार यहां के कुछ इलाकों में हिंसा हो गई थी। जबकि एक दूसरे ग्रुप ने कहा कि जब पूरा भारत बंद है तो फिर नवी मुंबई और ठाणे को क्यों अलग रखा जाए।  
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आंदोलन के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसका सबसे ज्यादा असर मुंबई शहर की सब्जी मंडियों पर पड़ा है। बंद के चलते बाजारों में सब्जियां नहीं आईं जिसके चलते लोगों को काफी परेशानी हुई। वहीं इस आंदोलन के चलते पुणे में बस और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। 
 
हालांकि कोई हिंसा न हो इसे देखते हुए शहर के अलग-अलग नुक्कड़ और चौराहों पर भी पुलिस तैनात कर दी गई है। बता दें कि 7 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण मसले पर राज्य सरकार से तेजी बरतने और मराठा समाज से हिंसा ने हो जैसी सावधानियां बरतने को कहा था। 
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बता दें कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा संगठनों द्वारा आज बुलाये गये महाराष्ट्र बंद के चलते पिछले महीने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी हुई थी। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने बंद के मद्देनजर संवेदनशील स्थानों पर त्वरित कार्यबल की छह कंपनियां और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षाबल तथा राज्य रिजर्व पुलिस बल की एक-एक कंपनी तैनात की है। 

उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर पुलिस की मदद के लिए होमगार्ड के जवान भी तैनात किए गए हैं। पुलिस ने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और कानून व्यवस्था को हाथ में न लेने की अपील की है। पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर रख रही है। राज्य के मुख्य सचिव डी के जैन ने बंद से पहले सुरक्षा उपायों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उपनगरीय रेल सेवा सुचारु ढंग से चले तथा स्कूल एवं अन्य सेवाएं प्रभावित न हों।

इससे पहले मराठा आरक्षण को लेकर जारी खुदकुशी पर चिंता व्यक्त करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने कहा था कि मराठा समुदाय के लोग धैर्य रखें। न तो हिंसक गतिविधियों में शामिल हों और न ही आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाएं। क्योंकि, मामला अभी अदालत में न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं, राज्य सरकार से आरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट 10 सितंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति अनूजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर शुरू आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य पिछड़ा आयोग जल्द से मराठा आरक्षण से जड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे। सरकार का इस रिपोर्ट पर निर्णय लेना वैधानिक दायित्व है। हम आयोग से आशा व अपेक्षा रखते है कि वह अपना काम दो महीने में पूरा कर लेगा। 
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