महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन का समर्थन करने आए एक प्रदर्शनकारी की गुरुवार को संदिग्ध हार्ट अटैक से मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, मृतक मनोज जारांगे के आंदोलन के समर्थन में अंतरवाली सराटी गांव पहुंचे थे, जहां जारांगे पिछले छह दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण आंदोलन के समर्थन में पहुंचे बीड निवासी दशरथ रायकर की संदिग्ध हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह मनोज जारांगे के आंदोलन में शामिल होने के लिए अंतरवाली सराटी पहुंचे थे। डॉक्टरों के मुताबिक मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी। जारांगे 29 अगस्त से मराठा आरक्षण और गजट रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
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पोस्टमार्टम के बाद ही साफ होगी मौत की वजह
रायकर के शव को पोस्टमार्टम के लिए अंबाड के सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल भेज दिया गया। अंबाड के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर स्वप्निल पाटिल ने बताया कि प्रथम दृष्टया हार्ट अटैक की आशंका है, लेकिन मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।
आंदोलन का समर्थन करने बीड से जालना पहुंचे थे रायकर
मनोज जारांगे के एक समर्थक ने बताया कि बीड जिले के संगम गांव के रहने वाले दशरथ रायकर आंदोलन को समर्थन देने के लिए अंतरवाली सराटी पहुंचे थे। यह गांव जालना से करीब 100 किलोमीटर दूर है। रायकर मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए यहां आए थे।
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रात में पार्किंग में सोए, सुबह नहीं उठे
जानकारी के मुताबिक, दशरथ रायकर बुधवार रात विरोध प्रदर्शन स्थल के पास एक खेत में बनाई गई पार्किंग में सोए थे। गुरुवार सुबह जब साथी प्रदर्शनकारियों ने देखा कि वह काफी देर से नहीं उठे हैं, तो उन्होंने उन्हें तुरंत अंबाड के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
29 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं मनोज जारांगे
मराठा आरक्षण के लिए एक्टिविस्ट मनोज जारांगे ने 29 अगस्त को जालना जिले के अंतरवाली सराटी में अपनी नई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी प्रमुख मांगों में मराठा समुदाय को आरक्षण देना और गजट रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल कुनबी प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। मनोज जारांगे ने अपने आंदोलन को मुंबई तक ले जाने की धमकी भी दी है। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर उनका आंदोलन लगातार जारी है और बड़ी संख्या में समर्थक अंतरवाली सराटी पहुंच रहे हैं।
कुनबी प्रमाणपत्र की क्यों हो रही है मांग?
आंदोलनकारी मराठा समुदाय के लोगों के लिए कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं। इसके जरिए उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। कुनबी खेती-किसानी से जुड़ा समुदाय है और महाराष्ट्र में इसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल किया गया है।