महाराष्ट्र में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग को लेकर मंगलवार को लाखों कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। राज्य में कुल 18 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। राज्य सरकार और नगर निकाय संचालित अस्पतालों में काम करने वाले अर्द्धचिकित्सा कर्मी और सफाई कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। यूनियनों और राज्य सरकार के बीच सोमवार को बातचीत विफल होने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया।
कर्मचारियों ने मंगलवार को सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों के बाहर पुरानी पेंशन के समर्थन में नारेबाजी की। एक दिन पहले ही, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पुरानी पेंशन योजना बहाली की राज्य सरकार के कर्मचारियों की मांग पर गौर करने के लिए वरिष्ठ नौकरशाहों के एक पैनल की घोषणा की थी। सरकार के लिए राहत की बात रही कि महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ हड़ताल में शामिल नहीं हुआ। संघ के अध्यक्ष संभाजी थोरात ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए हम सरकारी को समय देना चाहते हैं। इसलिए हड़ताल वापस ले रहे हैं।
दोनों सदनों में मेस्मा विधेयक मंजूर
राज्य में सरकारी कर्मचारियों की जारी हड़ताल के बीच सरकार ने विधानसभा व विधान परिषद में महाराष्ट्र अत्यावश्यक सेवा परिरक्षण अधिनियम (मेस्मा) विधेयक को मंजूर करा लिया है। इससे हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है। मंत्री गुलाबराव पाटील ने बताया कि मेस्मा कानून की अवधि 28 फरवरी 2023 को खत्म हो गई थी। इसलिए सरकार ने अगले पांच साल की अवधि विस्तार के लिए विधेयक मंजूर कराया है।
ओपीएस की मांग के प्रति सरकार सहानुभूति रखती है: सीएम शिंदे
पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के जारी विरोध के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा कि इस संबंध में चर्चा हुई है और उनकी सरकार इस मांग के प्रति संवेदनशील है। शिंदे ने कहा कि इस मामले में आगे विचार-विमर्श करने की जरूरत है। हमारी सरकार इस मांग के प्रति सहानुभूति रखती है और मैं एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों से आग्रह करूंगा कि वे हमारे साथ बैठें और चर्चा करें क्योंकि बातचीत के माध्यम से ही सभी मुद्दों को हल किया जा सकता है और एक अच्छा निर्णय लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि इस मुद्दे को हल करने और इसमें सभी की संतुष्टि हो ऐसी व्यवस्थित करने के लिए एक समिति बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, हम आश्वस्त कर सकते हैं कि कर्मचारी मौजूदा नई पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी लाभ से वंचित नहीं होंगे। यदि कोई अपनी सेवा अवधि के बीच में सेवानिवृत्त होता है, तो उसे भी सभी लाभ मिलेंगे जैसे कि वह अपने पूर्ण कार्यकाल के पूरा होने के बाद प्राप्त करता।
कर्मचारियों को वह मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं: उद्धव ठाकरे
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मांग की कि कर्मचारियों को वह मिले जिसके वे हकदार हैं। ठाकरे ने कहा, सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। इस सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। यह सरकार पुरानी पेंशन योजना को लागू क्यों नहीं कर सकती? कुछ राज्यों ने इसे पहले ही लागू कर दिया है। कर्मचारियों को वह मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं।
उद्धव ठाकरे के बेटे और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि राज्यभर के लोग वर्तमान सरकार से खुश नहीं हैं और जहां सरकारी कर्मचारी मौजूदा पेंशन योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं किसानों की आत्महत्याएं भी बढ़ रही हैं।