भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या व हाल में जुनैद की हत्या के खिलाफ रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। इसमें मेवाती समाज के साथ कई अन्य संगठनों व जेएनयू छात्रसंघ ने हिस्सा लिया। इसमें जुनैद के परिवार के अलावा पहलू खान और नजीब के परिजन भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने मानव शृंखला बनाकर हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने गाय के नाम पर हो रही हिंसा और भीड़ द्वारा हो रही हत्याओं की तीखी निंदा की। लोगों ने हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री के बयान को केवल दिखावा बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रधानमंत्री बड़े-बड़े मंचों से हत्याओं के खिलाफ बयान देते हैं, जबकि संघ परिवार के संगठनों से जुड़े लोग सड़क पर गुंडागर्दी करते हैं।
जुनैद के परिजनों ने कहा कि लगातार हिंसा का माहौल बनाया जा रहा है। यही वजह रही कि उनके 16 साल के बच्चे की लोकल ट्रेन में निर्मम हत्या कर दी गई। हैरानी की बात है कि ट्रेन में मौजूद लोग भी जुनैद को बचाने के लिए आगे नहीं बढ़े। कहीं भी मारपीट होने पर साथ चलने वाले लोग समझौता करा देते थे। परिजनों ने सवाल किया कि क्या सरकार उनके बच्चे को वापस लौटा सकेगी।
वहीं, छात्र नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद समाज को अलग-अलग टुकड़ों में में बांटा जा रहा है। संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आए मंत्रियों, सांसदों और संस्था के प्रमुखों ने समाज में नफरत फैलाने वाले विचारों के बीज बोने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। इसी का नतीजा है कि बीफ, गोहत्या और दबंग जातियों की बात न मानने के नाम पर भीड़ लोगों को मार रही है।
हिंदू-मुस्लिम एकता मंच ने भी धर्म के नाम पर देश को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई। दूसरी तरफ सुदर्शन वाहिनी ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर विरोध जताया, जिसमें गोरक्षकों के नाम पर हिंसा करने वालों को हत्यारा बताया है।